विशेष रिपोर्ट
अनुराग सिंह बिष्ट
उत्तर प्रदेश/ लखनऊ/ रायबरेली
सलोन कोतवाल संदीप राय ने अपने कारनामों से कप्तान को हाईकोर्ट तक पहुंचाया, एसपी से मांगा गया पर्सनल एफिडेविट…..
इनसे मिलिए ये हैं अपनी तथाकथित योग्यता और प्रभुता के गुरूर में चूर सलोन इंस्पेक्टर संदीप राय। हर मामले में खुद महाज्ञानी और जिले का इकलौता स्वयंभू तेज इंस्पेक्टर मानते हैं। कारनामा सलोन थाने के इंस्पेक्टर का और जवाबदेही जिले के कप्तान की! सलोन इंस्पेक्टर संदीप राय की कार्यशैली से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अब पुलिस अधीक्षक रायबरेली से व्यक्तिगत हलफनामा मांग लिया। यानी थाने के स्तर पर उठे सवालों का जवाब अब कप्तान साहब को अदालत में देना होगा। इसे कहते हैं, काम मातहत का, इम्तिहान कप्तान का! 13 अक्टूबर को हुई सुनवाई में सरकारी अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता दीपक कुमार पांडेय छह और सात सितंबर की सीसीटीवी फुटेज में थाने पर नहीं मिले और उनकी लोकेशन थाने से दूर बताई गई, लेकिन वह लोकेशन आखिर थी कहां, यह स्पष्ट नहीं हो सका। हाईकोर्ट ने संबंधित अवधि की सीसीटीवी फुटेज और याचिकाकर्ता की सटीक लोकेशन के साथ एसपी से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने को कहा है। अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को होगी। संदीप राय की पूर्व तैनाती सुल्तानपुर में थी, यहां मकान कब्जे कराने के आरोप के बाद थाने से हटाया गया। नगर कोतवाली से लापरवाही के कारण लाइन हाजिर किया गया। राय साहब को अब पता होना चाहिए कि वर्दी अधिकार देती है, मनमानी का लाइसेंस नहीं। इन्हें शायद यह नहीं पता कि अगर एसपी साहब ने चार्ज दिया है तो कानून से काम करने के लिए। जनता को परेशान करने वालों को वह पैदल करने में समय नहीं लगाते फिर वह कोई भी हो।




