उत्तर प्रदेश/लखनऊ
यूपी/हेड
राजीव आनन्द
किसानों, मजदूरों, गन्ना उत्पादकों की ज्वलंत समस्याओं के समाधान की मांग।
भारतीय किसान यूनियन उत्तर प्रदेश के किसानों, मजदूरों एवं ग्रामीण समाज से जुड़ी गंभीर समस्याओं की ओर प्रदेश सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष निम्न मांगें रखी है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था में किसानों और मजदूरों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके बावजूद बढ़ती कृषि लागत, फसलों का उचित मूल्य न मिलना, गन्ना भुगतान में देरी, खाद-बीज की किल्लत, बिजली संबंधी समस्याएं, प्राकृ तिक आपदाओं से होने वाला नुकसान तथा मजदूरों की आर्थिक असुरक्षा किसानों और ग्रामीण परिवारों के सामने गंभीर संकट उत्पन्न कर रही हैं।
भारतीय किसान यूनियन मांग करती है कि सरकार इन समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करें।
प्रमुख मांगेंः-
1. गन्ना मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया जाए:-
आगामी पेराई सत्र शुरू होने से पहले गन्ने का मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया जाए, ताकि किसानों को उनकी फसल का लाभकारी मूल्य मिल सके। गन्ने की बढ़ती उत्पादन लागत, खाद, बीज, कीटनाशक, डीजल, बिजली एवं मजदूरी के खर्च को ध्यान में रखते हुए उचित मूल्य सुनिश्चित किया जाए।
2. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू हों:- केंद्र सरकार से स्वामीनाथन आयोग
की सिफारिशों को लागू कराने की दिशा में प्रभावी पहल की जाए। कृषि उपज के लिए लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करने की मांग को पूरा किया जाए तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी प्रदान की जाए, जिससे किसानों को बाजार में उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
3. गन्ने का बकाया भुगतान ब्याज सहित कराया जाए:- प्रदेश की सभी चीनी मिलों
पर किसानों का लंबित गन्ना मूल्य तत्काल जारी कराया जाए। गन्ना भुगतान में देरी पर लागू कानून एवं न्यायालय के प्रासंगिक आदेशों के अनुसार ब्याज सहित भुगतान सुनिश्चित किया जाए। संबंधित उच्च न्यायालय के आदेशों का प्रभावी अनुपालन कराते हुए सभी पात्र किसानों को ब्याज का लाभ दिलाया जाए। भुगतान में जानबूझकर देरी
करने वाली मिलों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। 4. कृषि यंत्रों को जीएसटी मुक्त किया जाए:- ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, सिंचाई यंत्र, स्प्रे
मशीन, हार्वेस्टर, थ्रेशर तथा अन्य आवश्यक कृषि मशीनरी पर जीएसटी समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार से प्रभावी पहल की जाए। कृषि उपकरणों की कीमतों को किसानों की पहुंच में लाया जाए।
5. खाद और बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होः- रबी एवं खरीफ की बुवाई से
पहले प्रमाणित बीज, डीएपी, यूरिया तथा अन्य आवश्यक उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी, ओवररेटिंग तथा निर्धारित मात्रा से कम खाद देने पर रोक लगाई जाए। किसानों को लाइन में लगकर परेशान न होना पड़े तथा प्रत्येक जनपद में मांग के अनुसार आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
6. किसानों को घरेलू बिजली में 300 यूनिट निःशुल्क बिजली मिलेः- प्रदेश के
किसानों के घरेलू बिजली उपयोग के लिए प्रति माह 300 यूनिट निःशुल्क बिजली उपलब्ध कराने की योजना लागू की जाए। साथ ही निजी नलकूपों से सिंचाई के लिए निःशुल्क बिजली योजना को पारदर्शी बनाया जाए। सरकार स्पष्ट शासनादेश जारी करे, जिससे पात्र किसानों के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर शून्य भुगतान का संदेश प्राप्त हो तथा किसी प्रकार का अनावश्यक बिल या बकाया न दर्शाया जाए।
7. आवारा पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान होः- आवारा पशुओं से फसलों को
हो रहे नुकसान को रोकने के लिए पर्याप्त गो-आश्रय स्थल, चारा, पानी, देखभाल एवं पशु चिकित्सा की व्यवस्था की जाए। ग्राम पंचायतों और नगर निकायों को आवश्यक बजट तथा संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। खेतों में फसल की सुरक्षा के लिए किसानों को लगातार रात में पहरा देने की मजबूरी से राहत दिलाई जाए तथा फसल नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए।
8. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का प्रभावी क्रियान्वयन होः योजना के अंतर्गत किसानों को वास्तविक लाभ दिलाया जाए। फसल नुकसान के सर्वेक्षण में पारदर्शिता रखी जाए तथा पात्र किसानों के बीमा दावों का समयबद्ध भुगतान किया जाए। उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जनपद में नोडल अधिकारी एवं शिकायत निवारण कार्यालय स्थापित किया जाए। निजी बीमा कंपनियों की जवाबदेही तय की जाए और किसानों के हितों की रक्षा के लिए वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा करते हुए निजीकरण से उत्पन्न
समस्याओं का समाधान किया जाए। 9. किसान आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं:- किसान आंदोलनों एवं
जनहित के प्रदर्शनों के दौरान किसानों और किसान नेताओं पर दर्ज मुकदमों की समीक्षा की जाए। राजनीतिक द्वेष अथवा शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक गतिविधियों से संबंधित
मामलों को प्राथमिकता से वापस लिया जाए। 10. लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों को न्याय मिलेः- लखीमपुर खीरी हिंसा से
संबंधित मामलों में निष्पक्ष एवं समयबद्ध न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए। दोषसिद्धि की स्थिति में कानून के अनुसार दोषियों को सजा दिलाई जाए। पीड़ित परिवारों को न्याय, सुरक्षा, उचित मुआवजा तथा अन्य पात्र सहायता उपलब्ध कराई जाए।
11. अतिवृष्टि एवं प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को मुआवजा मिलेः- प्रदेश
में अत्यधिक वर्षा, जलभराव, बाढ़, ओलावृष्टि, सूखा एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों और आम नागरिकों की क्षति का तत्काल सर्वे कराया जाए। फसल, पशुधन, मकान तथा अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान का निष्पक्ष आकलन कर पात्र प्रभावित परिवारों को शीघ्र मुआवजा दिया जाए। सर्वेक्षण में किसी भी पात्र किसान को छूटने न दिया जाए।
12. एमएसपी पर सरकारी खरीद की प्रभावी व्यवस्था होः- धान, गेहूं, दलहन, तिलहन, मक्का एवं अन्य प्रमुख फसलों की सरकारी खरीद पर्याप्त केंद्रों पर सुनिश्चित की जाए। खरीद केंद्रों पर बिचौलियों के हस्तक्षेप को रोका जाए तथा किसानों को समय से भुगतान किया जाए। छोटे एवं सीमांत किसानों को प्राथमिकता के साथ खरीद की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
13. डीजल, बिजली, खाद और कृषि लागत पर राहत मिलेः- कृषि में इस्तेमाल होने वाले डीजल, उर्वरक, कीटनाशक, बीज तथा अन्य आवश्यक सामग्री की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। छोटे और सीमांत किसानों को कृषि लागत कम करने के लिए विशेष सहायता एवं अनुदान उपलब्ध कराया जाए।
14. किसानों का कर्ज और आर्थिक संकट दूर करने के लिए नीति बनेः- छोटे एवं सीमांत किसानों तथा प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों के कर्ज के बोझ की समीक्षा कर राहत नीति बनाई जाए। सहकारी बैंकों एवं अन्य पात्र संस्थागत कृषि ऋणों के संबंध में उचित राहत, पुनर्भुगतान में आवश्यक मोहलत और ब्याज संबंधी सहायता प्रदान की जाए। किसानों को साहूकारों के शोषण से बचाने के लिए प्रभावी व्यवस्था की जाए।15. भूमिहीन कृषि मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा मिले:- खेतों में काम करने वाले
भूमिहीन कृषि मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी का प्रभावी पालन कराया जाए। मजदूरों को समय से मजदूरी, दुर्घटना सहायता, स्वास्थ्य सुरक्षा, पेंशन तथा पात्र सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाए। मनरेगा के अंतर्गत मांग के अनुसार काम उपलब्ध कराया जाए और मजदूरी का भुगतान समय से हो। काम न मिलने की स्थिति में कानून के अंतर्गत देय बेरोजगारी भत्ते सहित अन्य अधिकार सुनिश्चित किए जाएं।
16. सिंचाई व्यवस्था और नहरों की सफाई कराई जाएः- प्रदेश की नहरों, रजवाहों,
माइनरों एवं सरकारी सिंचाई प्रणालियों की समय से सफाई और मरम्मत कराई जाए। टेल तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित हो। सिंचाई विभाग की लापरवाही से किसानों को होने वाले नुकसान को रोका जाए तथा क्षतिग्रस्त नलकूपों और अन्य
सिंचाई संसाधनों की शीघ्र मरम्मत कराई जाए। 17. भूमि अधिग्रहण में किसानों को उचित मुआवजा मिलेः- सड़क, एक्सप्रेसवे,
औद्योगिक परियोजनाओं, बिजली परियोजनाओं एवं अन्य विकास कार्यों के लिए भूमि अधिग्रहण करते समय किसानों को कानून के अनुसार उचित मुआवजा, पारदर्शी प्रक्रिया तथा पात्र पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। प्रभावित किसानों की सहमति, आपत्तियों और पुनर्वास संबंधी अधिकारों का सम्मान किया जाए। सर्किल रेट की समीक्षा कर वास्तविक बाजार मूल्य के अनुरूप मुआवजा निर्धारित किया जाए।
18. बिजली विभाग की मनमानी पर रोक लगाई जाएः- किसानों और ग्रामीण
उपभोक्ताओं के गलत बिजली बिलों को तत्काल ठीक किया जाए। पुराने विवादित बिलों, गलत मीटर रीडिंग, अनावश्यक जुर्माने तथा उत्पीड़न की शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण हो। बिजली कनेक्शन, ट्रांसफार्मर बदलने और लाइन मरम्मत की प्रक्रिया सरल बनाई जाए।
19. ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाएः- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों,
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा जिला अस्पतालों में चिकित्सकों, दवाइयों, जांच सुविधाओं और एंबुलेंस की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी दूर की जाए तथा गरीब किसानों और मजदूरों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जाए।
20. ग्रामीण शिक्षा एवं सरकारी विद्यालयों की स्थिति सुधारी जाएः- सरकारी विद्यालयों
में शिक्षकों की उपलब्धता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पेयजल, शौचालय, भवन और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। गरीब किसान एवं मजदूर परिवारों के बच्चों को शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराए जाएं।21. गन्ना किसानों की अन्य समस्याओं का समाधान किया जाए:- चीनी मिलों द्वारा
गन्ना पर्चियों में अनियमितता. तौल में गडबडी, घटतौली तथा भुगतान संबंधी शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। गन्ना केंद्रों पर किसानों के लिए पेयजल, बैठने, प्रकाश और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। गन्ना सर्वेक्षण एवं सट्टा प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए तथा किसानों की आपत्तियों का समय से निस्तारण किया जाए।
22. मंडियों में किसानों का शोषण रोका जाए:- कृषि मंडियों में किसानों की उपज की
तौल पारदर्शी हो तथा निर्धारित नियमों के विरुद्ध किसी प्रकार की कटौती न की जाए। मंडी शुल्क, आढ़त और अन्य प्रभारों की जांच की जाए। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले और भुगतान में अनावश्यक देरी न हो।
23. पशुपालकों एवं दुग्ध उत्पादकों को उचित मूल्य मिलेः- दूध उत्पादकों को उनकी
लागत के अनुरूप लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी नीति बनाई जाए। पशुओं के चारे, उपचार, टीकाकरण और पशु चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाई जाए। छोटे पशुपालकों को सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से दिया जाए।
24. ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल, सड़क और जलनिकासी की व्यवस्था होः- गांवों में स्वच्छ
पेयजल, टूटी सड़कों की मरम्मत, जलभराव से मुक्ति तथा नालियों की सफाई सुनिश्चित की जाए। बरसात में जलनिकासी की उचित व्यवस्था की जाए, ताकि किसानों, मजदूरों और आम ग्रामीणों को आवागमन तथा दैनिक जीवन में परेशानी न हो।
25. किसानों और मजदूरों की शिकायतों के लिए जिला स्तरीय व्यवस्था बनेः- प्रत्येक
जनपद में किसानों एवं मजदूरों की समस्याओं के समाधान के लिए नियमित जनसुनवाई और नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएं। लंबित शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण हो तथा कार्रवाई की जानकारी शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराई जाए।
26. किसानों के विरुद्ध जबरन वसूली और भ्रष्टाचार पर रोक लगेः- सरकारी
योजनाओं, खाद-बीज वितरण, कृषि अनुदान, बिजली कनेक्शन, मुआवजा तथा अन्य सेवाओं में रिश्वतखोरी एवं अनियमितताओं पर कठोर कार्रवाई की जाए। पात्र किसानों को बिना किसी बिचौलिए के योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए।
27. किसानों और मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित होः- वृद्ध किसानों,
कृषि मजदूरों, भूमिहीन श्रमिकों तथा असंगठित क्षेत्र के पात्र कामगारों को पेंशन, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य सहायता और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ सरल प्रक्रिया से दिया जाए। पात्र परिवारों को राशन, आवास और अन्य मूलभूत सुविधाओं से वंचित न रखा जाए।अतः भारतीय किसान यूनियन उत्तर प्रदेश सरकार से मांग करती है कि उपर्युक्त सभी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को तत्काल आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं।
किसानों, मजदूरों एवं ग्रामीण जनता के हित में स्पष्ट कार्य योजना तैयार कर प्रत्येक मांग पर समयबद्ध कार्रवाई की जाए। प्रमुख मांगों पर सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच वार्ता आयोजित की जाए तथा लिए गए निर्णयों की लिखित जानकारी उपलब्ध कराई जाए। किसान और मजदूर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उनकी समस्याओं की अनदेखी प्रदेश के कृषि क्षेत्र, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन को प्रभावित करती है। भारतीय किसान यूनियन अपेक्षा करती है कि सरकार किसानों और मजदूरों के हितों की रक्षा करते हुए न्यायपूर्ण एवं ठोस निर्णय लेगी।




