गंगा-जमुनी तहजीब के रंगों के साथ सजी ‘कॉटन एंड सिल्क फैब प्रदर्शनी 2026

विशेष रिपोर्ट

अनुराग सिंह बिष्ट

राजधानी/ लखनऊ

गंगा-जमुनी तहजीब के रंगों के साथ सजी ‘कॉटन एंड सिल्क फैब प्रदर्शनी 2026’

सफेद बारादरी में देशभर के 100 से अधिक मास्टर बुनकरों के उत्पाद बने आकर्षण का केंद्र, पारंपरिक हथकरघा और आधुनिक डिजाइन का अनूठा संगम

लखनऊ। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर कैसरबाग स्थित सफेद बारादरी में ‘कॉटन एंड सिल्क फैब प्रदर्शनी 2026’ का शुभारंभ हुआ। प्रदर्शनी में देश के विभिन्न राज्यों से आए 100 से अधिक मास्टर बुनकरों द्वारा तैयार किए गए पारंपरिक सिल्क और कॉटन हैंडलूम उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। भारतीय हथकरघा की समृद्ध विरासत, पारंपरिक शिल्प और आधुनिक फैशन का अनूठा संगम यहां देखने को मिल रहा है।
प्रदर्शनी में बनारसी, चंदेरी, तसर, कांचीपुरम, इक्कत, पैठानी और जयपुरी बगरू प्रिंट जैसे आकर्षक परिधानों के साथ प्राकृतिक रेशों से तैयार वस्त्रों की विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध है। कश्मीरी प्योर क्रेप साड़ियां, शुद्ध सिल्क साड़ियां और विभिन्न आधुनिक डिजाइनों के पारंपरिक परिधान भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
आयोजक मानस आचार्य और जावेद मकसूद ने बताया कि प्रदर्शनी का उद्देश्य देश की गंगा-जमुनी तहजीब को आगे बढ़ाते हुए विभिन्न राज्यों के बुनकरों को एक साझा मंच प्रदान करना और भारतीय सिल्क एवं हैंडलूम की समृद्ध परंपरा को जन-जन तक पहुंचाना है।
जावेद मकसूद ने शहरवासियों से प्रदर्शनी में पहुंचकर भारतीय हथकरघा उत्पादों को प्रोत्साहित करने तथा बुनकरों की कला और मेहनत को सम्मान देने की अपील की। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों और लखनऊवासियों को शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं भी दीं।

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Date : 11 October 2026 Posted By : NEWS-DESK
गंगा-जमुनी तहजीब के रंगों के साथ सजी ‘कॉटन एंड सिल्क फैब प्रदर्शनी 2026
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विशेष रिपोर्ट

अनुराग सिंह बिष्ट

राजधानी/ लखनऊ

गंगा-जमुनी तहजीब के रंगों के साथ सजी ‘कॉटन एंड सिल्क फैब प्रदर्शनी 2026’

सफेद बारादरी में देशभर के 100 से अधिक मास्टर बुनकरों के उत्पाद बने आकर्षण का केंद्र, पारंपरिक हथकरघा और आधुनिक डिजाइन का अनूठा संगम

लखनऊ। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर कैसरबाग स्थित सफेद बारादरी में ‘कॉटन एंड सिल्क फैब प्रदर्शनी 2026’ का शुभारंभ हुआ। प्रदर्शनी में देश के विभिन्न राज्यों से आए 100 से अधिक मास्टर बुनकरों द्वारा तैयार किए गए पारंपरिक सिल्क और कॉटन हैंडलूम उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। भारतीय हथकरघा की समृद्ध विरासत, पारंपरिक शिल्प और आधुनिक फैशन का अनूठा संगम यहां देखने को मिल रहा है।
प्रदर्शनी में बनारसी, चंदेरी, तसर, कांचीपुरम, इक्कत, पैठानी और जयपुरी बगरू प्रिंट जैसे आकर्षक परिधानों के साथ प्राकृतिक रेशों से तैयार वस्त्रों की विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध है। कश्मीरी प्योर क्रेप साड़ियां, शुद्ध सिल्क साड़ियां और विभिन्न आधुनिक डिजाइनों के पारंपरिक परिधान भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
आयोजक मानस आचार्य और जावेद मकसूद ने बताया कि प्रदर्शनी का उद्देश्य देश की गंगा-जमुनी तहजीब को आगे बढ़ाते हुए विभिन्न राज्यों के बुनकरों को एक साझा मंच प्रदान करना और भारतीय सिल्क एवं हैंडलूम की समृद्ध परंपरा को जन-जन तक पहुंचाना है।
जावेद मकसूद ने शहरवासियों से प्रदर्शनी में पहुंचकर भारतीय हथकरघा उत्पादों को प्रोत्साहित करने तथा बुनकरों की कला और मेहनत को सम्मान देने की अपील की। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों और लखनऊवासियों को शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं भी दीं।

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