उत्तर प्रदेश/बलिया
यूपी/हेड
राजीव आनन्द
डीएसपी के यहां तैनात हेड कांस्टेबल बना एसडीएम सच्ची लगन, मेहनत से पाया मुकाम।
आपको बताते चले हौसला बुलन्द हो तो सब कुछ सम्भव है, जो शख्स अभी-अभी साहब के हुक्म पर चाय लाने के लिए दफ़्तर से बाहर निकला हो, वो चंद मिनटों बाद सीधे ‘एसडीएम’ बनकर लौटे और उसी साहब को अपनी कहानी सुनाकर हैरान कर दे—ये फिल्मी नहीं, बल्कि हकीकत है!
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के एक छोटे से गाँव के रहने वाले श्याम बाबू की कहानी किसी मिसाल से कम नहीं है। साल 2005 में महज 10वीं पास करने के बाद उन्होंने परिवार की आर्थिक तंगी से लड़ते हुए पुलिस में सिपाही की नौकरी ज्वाइन कर ली। वर्दी की नौकरी के साथ-साथ उनके भीतर का जज्बा शांत नहीं हुआ; उन्होंने ड्यूटी के बाद किताबों से नाता जोड़ा और धीरे-धीरे बीए और फिर एमए की डिग्री हासिल कर ली।

पढ़ाई का दायरा बढ़ा तो सपने भी बड़े हो गए, और उन्होंने उत्तर प्रदेश पीसीएस (PCS) की परीक्षा में किस्मत आजमानी शुरू कर दी। लगातार चार-असमर्थ प्रयासों और असफलता के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
आखिरकार, वह दिन आ ही गया जिसने सब कुछ बदलकर रख दिया। 23 फरवरी 2019 को जब पीसीएस का फाइनल रिजल्ट आया, तो श्याम बाबू ने पूरे प्रदेश में 52वीं रैंक हासिल कर ली और वे सीधे सिपाही से डिप्टी कलेक्टर यानी एसडीएम बन चुके थे। जिस वक्त यह करिश्मा हुआ, उस दिन भी वे आम दिनों की तरह डीएसपी के दफ़्तर में हेड कांस्टेबल के तौर पर तैनात थे।
डीएसपी साहब ने उन्हें नेहमी की तरह चाय लाने के लिए भेजा, और जब श्याम बाबू चाय लेने जा रहे थे, तभी रास्ते में उनके फोन पर परीक्षा पास होने का मैसेज आ गया। दिल की धड़कनें तेज थीं, लेकिन चेहरे पर वही सिपाही वाली शालीनता थी। वे चाय लेकर वापस लौटे और बेहद विनम्रता से डीएसपी साहब से बोले, “साहब, मैं पास हो गया हूँ, मैं एसडीएम बन गया हूँ!”
यह सुनते ही डीएसपी साहब दंग रह गए; उन्होंने तुरंत अपनी कुर्सी छोड़ी, खड़े होकर श्याम बाबू को सैल्यूट किया और वही चाय उन्हें खुद पिलाई जो वो साहब के लिए लेकर आए थे। यह कहानी चीख-चीख कर कहती है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर इरादा पक्का हो तो इंसान अपनी तकदीर खुद लिख सकता है!
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