AI जनरेटेड था तो फोरेंसिक प्रमाण कहाँ है ?

लखनऊ।

यूपी/हेड 

राजीव आनन्द 

 आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर का सवाल , AI जनरेटेड था तो फोरेंसिक प्रमाण कहाँ है ?

लाट भैरव, वाराणसी के वायरल वीडियो को “पूरी तरह AI जनरेटेड” बताए जाने और इसी प्रकरण में दर्ज FIR संख्या 0175/2026 को लेकर पूर्व IPS अधिकारी एवं आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने स्वतंत्र जांच की मांग की है।

डीजीपी यूपी को भेजी शिकायत में उन्होंने कहा है कि DCP काशी गौरव बंसवाल ने वीडियो को “पूरी तरह AI जनरेटेड” बताते हुए कहा था कि आम लोगों द्वारा मोबाइल से बनाए गए अन्य वीडियो देखकर तथा उन्हें जूम करके जांच के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया। लेकिन FIR में इस निर्णायक निष्कर्ष के समर्थन में किसी साइबर/डिजिटल फोरेंसिक परीक्षण अथवा तकनीकी प्रमाण का उल्लेख नहीं है।

इस बीच, बाद की स्वतंत्र पड़तालों में उसी कार्यक्रम के अनेक वीडियो सामने आए हैं, जिनमें कार्यक्रम स्थल पर पुलिसकर्मियों की उपस्थिति दिखाई देने की बात कही गई है,इससे DCP के “पूरी तरह AI जनरेटेड” निष्कर्ष पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

अमिताभ ठाकुर ने मांग की है कि मूल वीडियो तथा उपलब्ध वीडियो की स्वतंत्र जांच कराई जाए और जांच का निष्कर्ष सार्वजनिक किया जाए।

उन्होंने कहा कि यदि वीडियो AI जनरेटेड था तो उसका वैज्ञानिक प्रमाण सामने लाया जाए और यदि ऐसा प्रमाण नहीं था, तो पुलिस के दावे के संबंध में समुचित कार्रवाई की जाए।

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Date : 06 October 2026 Posted By : NEWS-DESK
AI जनरेटेड था तो फोरेंसिक प्रमाण कहाँ है ?
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लखनऊ।

यूपी/हेड 

राजीव आनन्द 

 आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर का सवाल , AI जनरेटेड था तो फोरेंसिक प्रमाण कहाँ है ?

लाट भैरव, वाराणसी के वायरल वीडियो को “पूरी तरह AI जनरेटेड” बताए जाने और इसी प्रकरण में दर्ज FIR संख्या 0175/2026 को लेकर पूर्व IPS अधिकारी एवं आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने स्वतंत्र जांच की मांग की है।

डीजीपी यूपी को भेजी शिकायत में उन्होंने कहा है कि DCP काशी गौरव बंसवाल ने वीडियो को “पूरी तरह AI जनरेटेड” बताते हुए कहा था कि आम लोगों द्वारा मोबाइल से बनाए गए अन्य वीडियो देखकर तथा उन्हें जूम करके जांच के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया। लेकिन FIR में इस निर्णायक निष्कर्ष के समर्थन में किसी साइबर/डिजिटल फोरेंसिक परीक्षण अथवा तकनीकी प्रमाण का उल्लेख नहीं है।

इस बीच, बाद की स्वतंत्र पड़तालों में उसी कार्यक्रम के अनेक वीडियो सामने आए हैं, जिनमें कार्यक्रम स्थल पर पुलिसकर्मियों की उपस्थिति दिखाई देने की बात कही गई है,इससे DCP के “पूरी तरह AI जनरेटेड” निष्कर्ष पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

अमिताभ ठाकुर ने मांग की है कि मूल वीडियो तथा उपलब्ध वीडियो की स्वतंत्र जांच कराई जाए और जांच का निष्कर्ष सार्वजनिक किया जाए।

उन्होंने कहा कि यदि वीडियो AI जनरेटेड था तो उसका वैज्ञानिक प्रमाण सामने लाया जाए और यदि ऐसा प्रमाण नहीं था, तो पुलिस के दावे के संबंध में समुचित कार्रवाई की जाए।

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