हज़रत हाजी वारिस अली शाह के सालाना उर्स में देवा पहुँचे दुनियावी तलबगार के दीवाने।

उत्तर प्रदेश/लखनऊ 

यूपी/हेड 

राजीव आनन्द 

हज़रत हाजी वारिस अली शाह के सालाना उर्स में देवा पहुँचे दुनियावी तलबगार के दीवाने।

लखनऊ 29 अक्टूबर 2026 दुनियावी तलबगार के दीवाने, राष्ट्रीय सामाजिक कार्यकर्ता संगठन के संयोजक मोहम्मद आफाक, इमामिया एजुकेशन ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी मौलाना अली हुसैन क़ुम्मी और इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हाजी फहीम सिद्दीकी ने हज़रत हाजी वारिस अली शाहؒ के सालाना उर्स के अवसर पर देवा नगरिया पहुँचकर अपनी अकीदत और मोहब्बत का इज़हार किया तथा हज़रत को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया।

इस अवसर पर मोहम्मद आफाक ने कहा कि हज़रत हाजी वारिस अली शाहؒ की शिक्षाएँ मोहब्बत, इंसानियत, भाईचारे, अमन-ओ-अमान और धार्मिक सद्भाव का संदेश देती हैं। दीवा शरीफ एक ऐसी रूहानी सरज़मीन है, जहाँ हर साल विभिन्न धर्मों और वर्गों से जुड़े लोग बड़ी अकीदत और एहतराम के साथ हाज़िरी देते हैं। यहाँ आने वाले अकीदतमंद धर्म और मज़हब के भेदभाव से ऊपर उठकर रूहानी सुकून हासिल करते हैं और आपसी मोहब्बत व भाईचारे की भावना को बढ़ावा देते हैं।

मौलाना अली हुसैन क़ुम्मी ने कहा कि हज़रत हाजी वारिस अली शाहؒ की दरगाह सदियों से भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब और साझा संस्कृति की एक प्रमुख पहचान रही है। यहाँ मुस्लिम और हिंदू दोनों धर्मों के मानने वाले समान अकीदत के साथ हाज़िरी देते हैं। यह नज़ारा इस बात की याद दिलाता है कि भारत की असली ताकत उसकी गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी सम्मान और विभिन्न धर्मों के बीच एकता एवं सद्भाव में निहित है।

हाजी फहीम सिद्दीकी ने कहा कि मौजूदा दौर में जब समाज में नफ़रत और दूरियाँ बढ़ाने की कोशिशें देखने को मिलती हैं, ऐसे समय में सूफ़ी संतों की शिक्षाओं और उनकी इंसानियत पर आधारित परंपराओं को आम करना समय की अहम ज़रूरत है। सूफ़ी बुज़ुर्गों ने हमेशा इंसानियत की सेवा, मोहब्बत, आपसी सहिष्णुता और अमन का पैग़ाम दिया है। उनकी शिक्षाओं पर अमल करके समाज में फैली नफ़रत को कम किया जा सकता है और लोगों के बीच विश्वास तथा भाईचारे को मज़बूत बनाया जा सकता है।

मोहम्मद आफाक ने आम जनता से अपील की कि वे सूफ़ी संतों की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाएँ, एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करें और देश में अमन, भाईचारे, मोहब्बत तथा राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने में अपनी अहम भूमिका निभाएँ।

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Date : 29 October 2026 Posted By : NEWS-DESK
हज़रत हाजी वारिस अली शाह के सालाना उर्स में देवा पहुँचे दुनियावी तलबगार के दीवाने।
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हज़रत हाजी वारिस अली शाह के सालाना उर्स में देवा पहुँचे दुनियावी तलबगार के दीवाने।

लखनऊ 29 अक्टूबर 2026 दुनियावी तलबगार के दीवाने, राष्ट्रीय सामाजिक कार्यकर्ता संगठन के संयोजक मोहम्मद आफाक, इमामिया एजुकेशन ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी मौलाना अली हुसैन क़ुम्मी और इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हाजी फहीम सिद्दीकी ने हज़रत हाजी वारिस अली शाहؒ के सालाना उर्स के अवसर पर देवा नगरिया पहुँचकर अपनी अकीदत और मोहब्बत का इज़हार किया तथा हज़रत को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया।

इस अवसर पर मोहम्मद आफाक ने कहा कि हज़रत हाजी वारिस अली शाहؒ की शिक्षाएँ मोहब्बत, इंसानियत, भाईचारे, अमन-ओ-अमान और धार्मिक सद्भाव का संदेश देती हैं। दीवा शरीफ एक ऐसी रूहानी सरज़मीन है, जहाँ हर साल विभिन्न धर्मों और वर्गों से जुड़े लोग बड़ी अकीदत और एहतराम के साथ हाज़िरी देते हैं। यहाँ आने वाले अकीदतमंद धर्म और मज़हब के भेदभाव से ऊपर उठकर रूहानी सुकून हासिल करते हैं और आपसी मोहब्बत व भाईचारे की भावना को बढ़ावा देते हैं।

मौलाना अली हुसैन क़ुम्मी ने कहा कि हज़रत हाजी वारिस अली शाहؒ की दरगाह सदियों से भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब और साझा संस्कृति की एक प्रमुख पहचान रही है। यहाँ मुस्लिम और हिंदू दोनों धर्मों के मानने वाले समान अकीदत के साथ हाज़िरी देते हैं। यह नज़ारा इस बात की याद दिलाता है कि भारत की असली ताकत उसकी गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी सम्मान और विभिन्न धर्मों के बीच एकता एवं सद्भाव में निहित है।

हाजी फहीम सिद्दीकी ने कहा कि मौजूदा दौर में जब समाज में नफ़रत और दूरियाँ बढ़ाने की कोशिशें देखने को मिलती हैं, ऐसे समय में सूफ़ी संतों की शिक्षाओं और उनकी इंसानियत पर आधारित परंपराओं को आम करना समय की अहम ज़रूरत है। सूफ़ी बुज़ुर्गों ने हमेशा इंसानियत की सेवा, मोहब्बत, आपसी सहिष्णुता और अमन का पैग़ाम दिया है। उनकी शिक्षाओं पर अमल करके समाज में फैली नफ़रत को कम किया जा सकता है और लोगों के बीच विश्वास तथा भाईचारे को मज़बूत बनाया जा सकता है।

मोहम्मद आफाक ने आम जनता से अपील की कि वे सूफ़ी संतों की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाएँ, एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करें और देश में अमन, भाईचारे, मोहब्बत तथा राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने में अपनी अहम भूमिका निभाएँ।

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