विशेष रिपोर्ट
अनुराग सिंह बिष्ट
राजधानी/ लखनऊ
*लखनऊ की पहचान – ऐतिहासिक मोती झील को जिंदा दफनाया जा रहा है!*
आबादी के बीचों-बीच शहर की इस धरोहर झील को मलबे और खनन की मिट्टी से पाट कर प्लॉट बना कर बेचने का खेल चल रहा है। चंद पैसों की कमाई के लिए सफेदपोश नेताओं का गैंग पीछे से पूरा सिस्टम चला रहा है।
क्षेत्र में भारी आक्रोश है। लोग कह रहे हैं – विधायक चुप हैं, पार्षद ने मुंह बंद कर लिया, अधिकारी देख कर भी अनदेखा कर रहे हैं। जनता तमाशा देख रही है।
याद रखिए – तालाब पाटना पर्यावरण हत्या है, हाईकोर्ट और NGT के आदेशों का सीधा उल्लंघन है। एक जांच हुई तो पाटन करने वाली जेसीबी से लेकर परमिशन देने वाले तक सबकी फाइल खुलेगी।
LDA और जिला प्रशासन से जनता का सीधे कहना है – मोती झील का पाटन तुरंत रोका जाए, नहीं तो जनता को मजबूर होकर सड़कों पर उतरना पड़ेगा!




