वरिष्ठ संवाददाता
अशोक सिंह नेगी
उत्तर प्रदेश/ कानपुर
*एम एच एम पब्लिक स्कूल में पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित*
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👉*खुशी को ₹2,100, तनवीर नियाज़ी को ₹1,100 और ख़िज़रा बानो को ₹500 का नकद पुरस्कार; 20 प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए*
*लखनऊ/कानपुर नगर*। एम एच एम पब्लिक स्कूल, 5D आवास विकास, हंसपुरम, नौबस्ता, कानपुर नगर में सीरत और आदाब व सुन्नत क्विज़ प्रतियोगिता 2026 का पुरस्कार वितरण समारोह गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में धार्मिक विद्वानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। समारोह का मुख्य उद्देश्य बच्चों एवं युवाओं को पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद साहब की सीरत, सुन्नतों, इस्लामी आदाब, अच्छे आचरण और नैतिक मूल्यों से जोड़ना था।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि क़ाज़ी-ए-शरियत, कानपुर, मौलाना इनाम उल्लाह साहब की उपस्थिति रही। उनके साथ मौलाना कलीम जामई, मौलाना ओवैस, मुजीब इकराम, एडवोकेट जावेद अख्तर खान, शब्बीर अहमद एवं हनीफ सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित करते हुए नकद पुरस्कार प्रदान किए गए। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली खुशी को ₹2,100, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले तनवीर नियाज़ी को ₹1,100 तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली ख़िज़रा बानो को ₹500 की नकद पुरस्कार राशि दी गई। इसके अतिरिक्त 20 प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए, जिससे उनका उत्साहवर्धन हुआ।
पुरस्कार वितरण समारोह में विजेताओं की उपलब्धियों की सराहना की गई। आयोजकों ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं बच्चों में पढ़ने की रुचि, धार्मिक एवं नैतिक ज्ञान, आत्मविश्वास और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना को बढ़ावा देती हैं।
कार्यक्रम में अब्दुल कय्यूम एवं कैंसर सिद्दीकी ने तरबियत अर्थात बच्चों के नैतिक एवं चारित्रिक निर्माण के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों की शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनके व्यक्तित्व में अच्छे संस्कार, विनम्रता, अनुशासन, बड़ों का सम्मान, छोटों से प्रेम, ईमानदारी और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता भी विकसित होनी चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि बच्चों की बेहतर तरबियत में माता-पिता, शिक्षकों और समाज की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बच्चों को बचपन से ही सही और गलत के बीच अंतर समझाना, अच्छे व्यवहार की शिक्षा देना तथा अपने दैनिक जीवन में अच्छे आदर्शों को अपनाने के लिए प्रेरित करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि सीरत-ए-पाक और सुन्नतों पर आधारित प्रतियोगिताएं बच्चों को केवल धार्मिक जानकारी ही नहीं देतीं, बल्कि उन्हें अपने जीवन में अच्छे आचरण और नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा भी देती हैं। शिक्षा के साथ तरबियत का समन्वय ही एक जिम्मेदार, संस्कारी और जागरूक समाज के निर्माण का आधार है।
कार्यक्रम में एम एच एम पब्लिक स्कूल के मैनेजर अशफाक सिद्दीकी और सिराज हाशिम ने अतिथियों का स्वागत एवं इस्तकबाल किया। उन्होंने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज में ज्ञान, संस्कार और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने के लिए ऐसे आयोजनों की निरंतर आवश्यकता है।
कार्यक्रम की निजामत (संचालन) ज़ैनब सिद्दीकी ने की। उन्होंने कार्यक्रम के विभिन्न चरणों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया और प्रतिभागियों तथा उपस्थित अतिथियों को आपस में जोड़े रखा।
समारोह में उपस्थित वक्ताओं ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों एवं युवाओं को अच्छे साहित्य, धार्मिक शिक्षा, नैतिक मूल्यों और ज्ञानवर्धक गतिविधियों से जोड़ना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी जिम्मेदारियों को समझने और समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद करते हैं।
इस अवसर पर रुखसाना, रूबीना, हदीसा, रहनुमा, नबीहा, दिलशाद खान, उमर सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। सभी ने प्रतियोगिता के विजेताओं को बधाई दी और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
आयोजकों ने प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों, पुरस्कार प्राप्त करने वाले बच्चों, अभिभावकों, अतिथियों और सहयोगियों का धन्यवाद किया। उन्होंने भविष्य में भी बच्चों के शैक्षिक, धार्मिक, नैतिक एवं व्यक्तित्व विकास के लिए ऐसे कार्यक्रम आयोजित करते रहने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
समारोह का संदेश स्पष्ट रहा कि तालीम के साथ तरबियत, ज्ञान के साथ अच्छे संस्कार और सफलता के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का भाव विकसित करना ही एक बेहतर समाज के निर्माण का मार्ग है।




