लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करो

वरिष्ठ संवाददाता

दिलीप सिंह रावत

राजधानी/ लखनऊ

*लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करो*
__________________________

👉*SIR और फासीवादी हमलों का विरोध करो*

👉*चारों श्रम संहिताओं को रद्द करो! मजदूरों, किसानों, छात्रों और नौजवानों को एकजुट करो!*

*लखनऊ।* ट्रेड यूनियन सेंटर ऑफ इंडिया (TUCI) की केंद्रीय समिति SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया की कड़ी निंदा करती है, जो आम लोगों, विशेष रूप से गरीबों, मजदूरों, प्रवासी श्रमिकों और वंचित वर्गों के मताधिकार को खतरे में डालती है। हम लोकतांत्रिक अधिकारों पर बढ़ते फासीवादी हमलों की भर्त्सना करते हैं और प्रत्येक नागरिक के मतदान के संवैधानिक अधिकार की रक्षा की मांग करते हैं।

चार नई श्रम संहिताओं को लागू करना भारतीय मजदूर वर्ग के कड़ी मेहनत से हासिल अधिकारों पर सीधा हमला है। ये संहिताएं श्रम सुरक्षा को कमजोर करती हैं, सामूहिक सौदेबाजी को कमजोर करती हैं और मजदूरों पर कॉरपोरेट नियंत्रण को मजबूत करती हैं। TUCI चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने की मांग करता है और देशभर के मजदूरों से कॉरपोरेट शोषण और सरकार की मजदूर-विरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान करता है।

TUCI लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन के स्थल के रूप में जंतर-मंतर की अधिसूचना रद्द किए जाने की खबर की कड़ी निंदा करता है। शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए मान्यता प्राप्त स्थान को प्रतिबंधित करना अभिव्यक्ति और सभा की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार पर हमला है। मजदूर वर्ग, छात्र, नौजवान, किसान और लोकतांत्रिक संगठनों को असहमति को चुप कराने और जन आंदोलनों को दबाने के हर प्रयास का विरोध करना चाहिए।

TUCI केंद्रीय समिति देशभर के मजदूरों से लोकतांत्रिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और संवैधानिक स्वतंत्रता की रक्षा में चल रहे छात्र और युवा आंदोलनों में शामिल होने की अपील करती है। मजदूरों को बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर कॉरपोरेट पूंजी को चुनौती देनी चाहिए, फासीवादी हमलों का प्रतिरोध करना चाहिए और शोषण, दमन और फासीवादी शासन के खिलाफ एकजुट जन आंदोलन का निर्माण करना चाहिए।

TUCI सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों से SIR से जुड़े मताधिकार से वंचित करने, चारों श्रम संहिताओं, लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंधों और कॉरपोरेट-प्रेरित नीतियों के खिलाफ मजदूरों, किसानों, छात्रों और उत्पीड़ित नौजवानों का देशव्यापी एकजुट आंदोलन शुरू करने और फैलाने में पहल करने का आह्वान करता है। जनता के वोट, श्रम अधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा के लिए व्यापक मजदूर एकता और सामूहिक प्रतिरोध के निर्माण का समय आ गया है।

×
Date : 16 October 2026 Posted By : NEWS-DESK
लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करो
News Image

वरिष्ठ संवाददाता

दिलीप सिंह रावत

राजधानी/ लखनऊ

*लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करो*
__________________________

👉*SIR और फासीवादी हमलों का विरोध करो*

👉*चारों श्रम संहिताओं को रद्द करो! मजदूरों, किसानों, छात्रों और नौजवानों को एकजुट करो!*

*लखनऊ।* ट्रेड यूनियन सेंटर ऑफ इंडिया (TUCI) की केंद्रीय समिति SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया की कड़ी निंदा करती है, जो आम लोगों, विशेष रूप से गरीबों, मजदूरों, प्रवासी श्रमिकों और वंचित वर्गों के मताधिकार को खतरे में डालती है। हम लोकतांत्रिक अधिकारों पर बढ़ते फासीवादी हमलों की भर्त्सना करते हैं और प्रत्येक नागरिक के मतदान के संवैधानिक अधिकार की रक्षा की मांग करते हैं।

चार नई श्रम संहिताओं को लागू करना भारतीय मजदूर वर्ग के कड़ी मेहनत से हासिल अधिकारों पर सीधा हमला है। ये संहिताएं श्रम सुरक्षा को कमजोर करती हैं, सामूहिक सौदेबाजी को कमजोर करती हैं और मजदूरों पर कॉरपोरेट नियंत्रण को मजबूत करती हैं। TUCI चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने की मांग करता है और देशभर के मजदूरों से कॉरपोरेट शोषण और सरकार की मजदूर-विरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान करता है।

TUCI लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन के स्थल के रूप में जंतर-मंतर की अधिसूचना रद्द किए जाने की खबर की कड़ी निंदा करता है। शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए मान्यता प्राप्त स्थान को प्रतिबंधित करना अभिव्यक्ति और सभा की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार पर हमला है। मजदूर वर्ग, छात्र, नौजवान, किसान और लोकतांत्रिक संगठनों को असहमति को चुप कराने और जन आंदोलनों को दबाने के हर प्रयास का विरोध करना चाहिए।

TUCI केंद्रीय समिति देशभर के मजदूरों से लोकतांत्रिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और संवैधानिक स्वतंत्रता की रक्षा में चल रहे छात्र और युवा आंदोलनों में शामिल होने की अपील करती है। मजदूरों को बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर कॉरपोरेट पूंजी को चुनौती देनी चाहिए, फासीवादी हमलों का प्रतिरोध करना चाहिए और शोषण, दमन और फासीवादी शासन के खिलाफ एकजुट जन आंदोलन का निर्माण करना चाहिए।

TUCI सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों से SIR से जुड़े मताधिकार से वंचित करने, चारों श्रम संहिताओं, लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंधों और कॉरपोरेट-प्रेरित नीतियों के खिलाफ मजदूरों, किसानों, छात्रों और उत्पीड़ित नौजवानों का देशव्यापी एकजुट आंदोलन शुरू करने और फैलाने में पहल करने का आह्वान करता है। जनता के वोट, श्रम अधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा के लिए व्यापक मजदूर एकता और सामूहिक प्रतिरोध के निर्माण का समय आ गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *