विशेष रिपोर्ट
अनुराग सिंह बिष्ट
राजधानी/ लखनऊ
*फैजुल्लागंज में बाढ़ के बीच चलती पुलिस की नाव ने दिलाई 1912 के टाइटैनिक की याद!*
रात का अंधेरा, चारों तरफ पानी ही पानी, और बीच में पुलिस की नाव धीरे-धीरे चल रही है…
नाव पर बैठे पुलिसकर्मी सीटी बजा रहे हैं – _”कोई है? अगर फंसे हो तो आवाज दो, 112 डायल करो, हमारी नाव की तरफ देखो, इशारा करो, हम मदद के लिए हैं!”_
ये मंजर देखकर 1912 में डूबे टाइटैनिक जहाज का वो सीन याद आ गया, जब जहाज डूबने के बाद बची हुई लाइफ बोट में बैठे लोग अंधेरे समंदर में सीटी बजाकर पुकार रहे थे – _”कोई है? कोई बचा है?”_
फैजुल्लागंज में भी वही हाल है। पानी में घिरे मकान, अंधेरा, और पुलिस की नाव ही उम्मीद की आखिरी किरण।
पुलिसकर्मी रात भर नाव में सवार होकर लोगों को ढूंढ रहे हैं, सीटी बजा रहे हैं, आवाज लगा रहे हैं।
*ये नजारा बता रहा है कि टाइटैनिक सिर्फ फिल्म नहीं, फैजुल्लागंज में हकीकत बन गया है।*
सैल्यूट है ऐसी पुलिस को जो अंधेरे में भी टाइटैनिक के हीरो की तरह लोगों की जान बचा रही है।




