उत्तर प्रदेश/ लखनऊ
यूपी/हेड
राजीव आनन्द
धनतेरस के दिन व्यपारियों के चेहरों पर मुस्कुराहट जरूर थी, पर राहगीर काफी परेशान रहे।
पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों के दावे फेल निकले।
राजधानी में यातायात की समस्या से निजात दिलाने में पुलिस।

कमिश्नरेट लखनऊ की पुलिस और यातायातकर्मी दिखे कमजोर।
राजधानी में चिनहट, अमीनाबाद, आलमबाग, नाका, बंगलाबाजार, ठाकुरगंज, सदर, हजरतगंज, यहियागंज, भूतनाथ, निशातगंज, समेत प्रमुख बाजारों में रौनक जरूर थी, पर क्या वाहन अतिक्रमण मुक्त थे।
सवाल उठता है क्या राजधानी की पुलिस और यातायातकर्मी मुस्तैद थे ?
जहां बर्तन, सोना-चांदी, मिट्टी के दिए, पूजन सामग्री और नई गाड़ियों की जमकर खरीदारी हुई, वहीं रास्ते से गुजरने वाले खासा दिक्कतों का सामना भी कर रहे थे।
ऐसा नहीं कि हर जोन के उच्च अधिकारीगण जोन में मौजूद नहीं थे, पर जब तक मौजूद रहे तब तक स्थानीय पुलिस और नियुक्त किए गए यातायातकर्मी भी काफी सक्रिय दिखाने में लगे थे।
दरअसल राजधानी का कोई भी ऐसा हिस्सा नहीं था जहां प्रशासन के दावे फेल नहीं दिखे, बस मुख्यमंत्री आवास एवं आसपास को छोड़ कर।
ज्यादातर सड़कों पर गाड़ियां रेंगती रहीं, राहगीर समय पर अपने स्थान तक पहुंचे नहीं।




