राष्ट्रपति हर्जोग के फैसले से इजरायल की सियासत में हलचल, नेतन्याहू पर बढ़ा दबाव

 

इजरायल में संसदीय चुनाव के नतीजों को लेकर चल रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने चुनाव आयोग से आधिकारिक नतीजे मिलने के बाद उन्हें कानूनी रूप से मान्यता दे दी है। इसके साथ ही उन्होंने नई सरकार के गठन की प्रक्रिया भी शुरू करने का ऐलान किया है। राष्ट्रपति अब विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात करेंगे और सरकार बनाने के लिए जरूरी परामर्श करेंगे।

चुनाव परिणामों को मान्यता मिलने से प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं। दरअसल, नेतन्याहू और उनके समर्थक चुनाव में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठा रहे थे। इस चुनाव में धार्मिक राष्ट्रवादी गठबंधन ने संसद में अपना बहुमत खो दिया है, जबकि अरब नेतृत्व वाले राजनीतिक दलों ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

नेतन्याहू समर्थकों ने लगाए थे चुनाव में धांधली के आरोप

चुनाव के बाद नेतन्याहू और उनके समर्थकों की ओर से अरब नेतृत्व वाले दलों पर चुनाव में कथित हेरफेर करने के आरोप लगाए गए थे। कुछ दावों में विदेशी ताकतों की भूमिका होने की आशंका भी जताई गई थी। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से ठोस सबूत सामने नहीं आए हैं।

अब चुनाव परिणामों को आधिकारिक मान्यता मिलने के बाद राष्ट्रपति के सामने नई सरकार के गठन की संवैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है। उन्हें राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से चर्चा करने के बाद उस नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना होगा, जिसके पास संसद में बहुमत का समर्थन जुटाने की सबसे अधिक संभावना हो।

चुनाव आयोग की जांच में नहीं मिली गड़बड़ी

इजरायल के चुनाव आयोग ने बुधवार को बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों की तरफ से लगाए गए धांधली के आरोपों की जांच की गई है। जांच के दौरान ऐसी कोई अनियमितता सामने नहीं आई, जिससे चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित हुई हो या अंतिम नतीजों में बदलाव की आशंका पैदा हुई हो।

इस बीच नेतन्याहू की लिकुड पार्टी से इस मामले पर प्रतिक्रिया मांगी गई, लेकिन फिलहाल उसकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया।

विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों की जांच कर रही शिन बेट

चुनाव में विदेशी ताकतों की संभावित भूमिका को लेकर इजरायल की खुफिया एजेंसी शिन बेट भी जांच कर रही है। एजेंसी के प्रमुख डेविड जिनी हैं, जिन्हें नेतन्याहू ने नियुक्त किया था।

बुधवार को चुनाव समिति की बैठक में समिति के प्रमुख और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नोआम सोहलबर्ग ने शिन बेट का एक खुफिया आकलन भी प्रस्तुत किया। इसमें दावा किया गया कि इजरायल में विदेशों से बड़ी मात्रा में धन पहुंचा है। इसमें उन देशों से आने वाले पैसे की आशंका भी जताई गई, जिन्हें इजरायल का विरोधी माना जाता है।

हालांकि, इस आकलन के समर्थन में सार्वजनिक तौर पर ठोस सबूत पेश नहीं किए गए हैं। बैठक में शामिल एक व्यक्ति के अनुसार, इस खुफिया रिपोर्ट की एक प्रति भी उपलब्ध कराई गई थी। बंद कमरे में हुई बैठक से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए उस व्यक्ति ने अपनी पहचान उजागर नहीं करने की शर्त रखी थी।

चुनाव समिति का कहना है कि विदेशी हस्तक्षेप से जुड़े आरोप गंभीर हैं और उनकी जांच जारी है। हालांकि, समिति के मुताबिक अब तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो कि किसी बाहरी ताकत के हस्तक्षेप ने चुनाव परिणामों को प्रभावित किया हो।

राष्ट्रपति हर्जोग ने जांच एजेंसियों पर जताया भरोसा

राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने कहा है कि उन्हें शिन बेट, पुलिस और देश की दूसरी कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर पूरा भरोसा है। उन्होंने चुनाव में संभावित विदेशी हस्तक्षेप से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष और विस्तृत जांच करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

हर्जोग ने इजरायल के अरब समुदाय को लेकर भी महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पूरे समुदाय को एक ही नजरिए से देखना उचित नहीं है। उन्होंने अरब नागरिकों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए देश के अलग-अलग क्षेत्रों में उनके योगदान और समाज के साथ मिलकर रहने की इच्छा की सराहना की।

अब सभी की नजरें इजरायल में सरकार गठन की प्रक्रिया पर टिकी हैं। राष्ट्रपति की ओर से राजनीतिक दलों के साथ होने वाली बातचीत और संसद में बहुमत जुटाने की स्थिति से देश की अगली सरकार की तस्वीर साफ होगी।

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Date : 05 November 2026 Posted By : ADMIN
राष्ट्रपति हर्जोग के फैसले से इजरायल की सियासत में हलचल, नेतन्याहू पर बढ़ा दबाव
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इजरायल में संसदीय चुनाव के नतीजों को लेकर चल रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने चुनाव आयोग से आधिकारिक नतीजे मिलने के बाद उन्हें कानूनी रूप से मान्यता दे दी है। इसके साथ ही उन्होंने नई सरकार के गठन की प्रक्रिया भी शुरू करने का ऐलान किया है। राष्ट्रपति अब विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात करेंगे और सरकार बनाने के लिए जरूरी परामर्श करेंगे।

चुनाव परिणामों को मान्यता मिलने से प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं। दरअसल, नेतन्याहू और उनके समर्थक चुनाव में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठा रहे थे। इस चुनाव में धार्मिक राष्ट्रवादी गठबंधन ने संसद में अपना बहुमत खो दिया है, जबकि अरब नेतृत्व वाले राजनीतिक दलों ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

नेतन्याहू समर्थकों ने लगाए थे चुनाव में धांधली के आरोप

चुनाव के बाद नेतन्याहू और उनके समर्थकों की ओर से अरब नेतृत्व वाले दलों पर चुनाव में कथित हेरफेर करने के आरोप लगाए गए थे। कुछ दावों में विदेशी ताकतों की भूमिका होने की आशंका भी जताई गई थी। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से ठोस सबूत सामने नहीं आए हैं।

अब चुनाव परिणामों को आधिकारिक मान्यता मिलने के बाद राष्ट्रपति के सामने नई सरकार के गठन की संवैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है। उन्हें राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से चर्चा करने के बाद उस नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना होगा, जिसके पास संसद में बहुमत का समर्थन जुटाने की सबसे अधिक संभावना हो।

चुनाव आयोग की जांच में नहीं मिली गड़बड़ी

इजरायल के चुनाव आयोग ने बुधवार को बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों की तरफ से लगाए गए धांधली के आरोपों की जांच की गई है। जांच के दौरान ऐसी कोई अनियमितता सामने नहीं आई, जिससे चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित हुई हो या अंतिम नतीजों में बदलाव की आशंका पैदा हुई हो।

इस बीच नेतन्याहू की लिकुड पार्टी से इस मामले पर प्रतिक्रिया मांगी गई, लेकिन फिलहाल उसकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया।

विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों की जांच कर रही शिन बेट

चुनाव में विदेशी ताकतों की संभावित भूमिका को लेकर इजरायल की खुफिया एजेंसी शिन बेट भी जांच कर रही है। एजेंसी के प्रमुख डेविड जिनी हैं, जिन्हें नेतन्याहू ने नियुक्त किया था।

बुधवार को चुनाव समिति की बैठक में समिति के प्रमुख और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नोआम सोहलबर्ग ने शिन बेट का एक खुफिया आकलन भी प्रस्तुत किया। इसमें दावा किया गया कि इजरायल में विदेशों से बड़ी मात्रा में धन पहुंचा है। इसमें उन देशों से आने वाले पैसे की आशंका भी जताई गई, जिन्हें इजरायल का विरोधी माना जाता है।

हालांकि, इस आकलन के समर्थन में सार्वजनिक तौर पर ठोस सबूत पेश नहीं किए गए हैं। बैठक में शामिल एक व्यक्ति के अनुसार, इस खुफिया रिपोर्ट की एक प्रति भी उपलब्ध कराई गई थी। बंद कमरे में हुई बैठक से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए उस व्यक्ति ने अपनी पहचान उजागर नहीं करने की शर्त रखी थी।

चुनाव समिति का कहना है कि विदेशी हस्तक्षेप से जुड़े आरोप गंभीर हैं और उनकी जांच जारी है। हालांकि, समिति के मुताबिक अब तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो कि किसी बाहरी ताकत के हस्तक्षेप ने चुनाव परिणामों को प्रभावित किया हो।

राष्ट्रपति हर्जोग ने जांच एजेंसियों पर जताया भरोसा

राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने कहा है कि उन्हें शिन बेट, पुलिस और देश की दूसरी कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर पूरा भरोसा है। उन्होंने चुनाव में संभावित विदेशी हस्तक्षेप से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष और विस्तृत जांच करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

हर्जोग ने इजरायल के अरब समुदाय को लेकर भी महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पूरे समुदाय को एक ही नजरिए से देखना उचित नहीं है। उन्होंने अरब नागरिकों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए देश के अलग-अलग क्षेत्रों में उनके योगदान और समाज के साथ मिलकर रहने की इच्छा की सराहना की।

अब सभी की नजरें इजरायल में सरकार गठन की प्रक्रिया पर टिकी हैं। राष्ट्रपति की ओर से राजनीतिक दलों के साथ होने वाली बातचीत और संसद में बहुमत जुटाने की स्थिति से देश की अगली सरकार की तस्वीर साफ होगी।

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