1900 ग्रेड-पे की पत्रावली को जानबूझकर लंबित किए जाने का आरोप, विशेष सचिव वित्त पुष्पराज की भूमिका की जांच की मांग।

उत्तर प्रदेश/लखनऊ।

यूपी/हेड 

राजीव आनन्द 

1900 ग्रेड-पे की पत्रावली को जानबूझकर लंबित किए जाने का आरोप, विशेष सचिव वित्त पुष्पराज की भूमिका की जांच की मांग।

लखनऊ 29 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी महासंघ एवं अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय महासचिव तथा उत्तर प्रदेश चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी महासंघ के प्रांतीय महामंत्री सुरेश सिंह यादव ने 1900 ग्रेड-पे से संबंधित पत्रावली को लंबे समय से लंबित रखे जाने पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की है, उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष सचिव, वित्त/वेतन आयोग, उत्तर प्रदेश शासन श्री पुष्पराज द्वारा पत्रावली को अनावश्यक रूप से इधर-उधर भेजकर लंबित किया जा रहा है, जबकि अपर मुख्य सचिव, वित्त, उत्तर प्रदेश शासन के स्तर से पत्रावली पर अनुमोदन किया जा चुका है।

यादव ने कहा कि राज कर विभाग के कर्मचारियों को 1900 ग्रेड-पे का लाभ दिए जाने से संबंधित पत्रावली संख्या 11770/11 शासन के विभिन्न स्तरों से आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद वित्त विभाग में पहुंची है। संघ का आरोप है कि अपर मुख्य सचिव, वित्त द्वारा पत्रावली का अनुमोदन किए जाने के बावजूद अंतिम स्तर की कार्रवाई में अनावश्यक विलंब किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वित्त विभाग के शासनादेश दिनांक 30 मार्च 2016 के आधार पर प्रदेश के विभिन्न विभागों में संबंधित कर्मचारियों को 1900 ग्रेड-पे का लाभ मिल रहा है। इसके बावजूद राज कर विभाग के कर्मचारियों के मामले में निर्णय लंबित रहना कर्मचारियों के साथ न्यायसंगत नहीं है।

सुरेश सिंह यादव ने आरोप लगाया कि विशेष सचिव वित्त पुष्पराज द्वारा निजी स्वार्थ अथवा अन्य कारणों से पत्रावली को बार-बार इधर-उधर भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह संघ का गंभीर आरोप है और इसकी वास्तविकता सामने लाने के लिए पत्रावली की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि पत्रावली संख्या 11770/11 को तत्काल तलब कर इसकी पूरी प्रक्रिया की जांच कराई जाए और यदि जांच में किसी अधिकारी की जानबूझकर लापरवाही, शासनादेश की अवहेलना अथवा अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि शासन स्तर से अनुमोदन होने के बाद भी कर्मचारियों को उनके वैधानिक लाभ के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। इससे पूरे प्रदेश के कर्मचारियों एवं अधिकारियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।

उन्होंने कहा कि कर्मचारी संगठन किसी अधिकारी के व्यक्तिगत विरोध में नहीं है, बल्कि कर्मचारियों के हित में निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध निर्णय की मांग कर रहा है, यदि किसी स्तर पर पत्रावली को जानबूझकर लंबित किया गया है तो उसकी जवाबदेही निर्धारित होना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग।

सुरेश सिंह यादव ने मुख्यमंत्री से मांग की कि इस पूरे प्रकरण में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए संबंधित पत्रावली की जांच कराई जाए तथा कर्मचारियों को 1900 ग्रेड-पे का लाभ दिए जाने के संबंध में नियमानुसार शीघ्र निर्णय कराया जाए।

उन्होंने कहा कि यदि इस मामले को शीघ्र संज्ञान में लेकर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो प्रदेश के कर्मचारी संगठन शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इसके तहत गांधी प्रतिमा, लखनऊ पर धरना-प्रदर्शन एवं ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। आंदोलन की अगली तिथि एवं कार्यक्रम की घोषणा संघ द्वारा शीघ्र की जाएगी।

यादव ने कहा कि प्रदेश के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों, वाहन चालकों तथा अन्य कर्मचारियों की कई समस्याएं लंबे समय से लंबित हैं। उन्होंने शासन द्वारा स्वीकृत रिक्त पदों पर नियमित भर्ती किए जाने, आउटसोर्सिंग व्यवस्था को समाप्त करने, पुरानी पेंशन बहाल करने, मृतक आश्रित नियुक्ति नियमावली के 14वें संशोधन पर पुनर्विचार करने तथा कोरोना काल के लंबित 18 माह के वेतन/भत्तों के संबंध में शीघ्र निर्णय किए जाने की मांग दोहराई।

उन्होंने कहा कि चतुर्थ श्रेणी एवं वाहन चालक के रिक्त पदों पर नियमित भर्ती होने से प्रदेश के गरीब एवं मध्यम वर्ग के युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। इसलिए सरकार को रिक्त पदों को भरने के साथ-साथ कर्मचारियों की लंबित मांगों पर भी समयबद्ध कार्रवाई करनी चाहिए।

सुरेश सिंह यादव ने कहा कि कर्मचारियों के हितों से जुड़े मामलों को अनिश्चितकाल तक लंबित रखना उचित नहीं है। यदि शासन स्तर पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेश के कर्मचारी एवं पदाधिकारी शांतिपूर्ण आंदोलन के माध्यम से अपनी आवाज बुलंद करेंगे और इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।

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Date : 29 October 2026 Posted By : NEWS-DESK
1900 ग्रेड-पे की पत्रावली को जानबूझकर लंबित किए जाने का आरोप, विशेष सचिव वित्त पुष्पराज की भूमिका की जांच की मांग।
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उत्तर प्रदेश/लखनऊ।

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राजीव आनन्द 

1900 ग्रेड-पे की पत्रावली को जानबूझकर लंबित किए जाने का आरोप, विशेष सचिव वित्त पुष्पराज की भूमिका की जांच की मांग।

लखनऊ 29 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी महासंघ एवं अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय महासचिव तथा उत्तर प्रदेश चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी महासंघ के प्रांतीय महामंत्री सुरेश सिंह यादव ने 1900 ग्रेड-पे से संबंधित पत्रावली को लंबे समय से लंबित रखे जाने पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की है, उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष सचिव, वित्त/वेतन आयोग, उत्तर प्रदेश शासन श्री पुष्पराज द्वारा पत्रावली को अनावश्यक रूप से इधर-उधर भेजकर लंबित किया जा रहा है, जबकि अपर मुख्य सचिव, वित्त, उत्तर प्रदेश शासन के स्तर से पत्रावली पर अनुमोदन किया जा चुका है।

यादव ने कहा कि राज कर विभाग के कर्मचारियों को 1900 ग्रेड-पे का लाभ दिए जाने से संबंधित पत्रावली संख्या 11770/11 शासन के विभिन्न स्तरों से आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद वित्त विभाग में पहुंची है। संघ का आरोप है कि अपर मुख्य सचिव, वित्त द्वारा पत्रावली का अनुमोदन किए जाने के बावजूद अंतिम स्तर की कार्रवाई में अनावश्यक विलंब किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वित्त विभाग के शासनादेश दिनांक 30 मार्च 2016 के आधार पर प्रदेश के विभिन्न विभागों में संबंधित कर्मचारियों को 1900 ग्रेड-पे का लाभ मिल रहा है। इसके बावजूद राज कर विभाग के कर्मचारियों के मामले में निर्णय लंबित रहना कर्मचारियों के साथ न्यायसंगत नहीं है।

सुरेश सिंह यादव ने आरोप लगाया कि विशेष सचिव वित्त पुष्पराज द्वारा निजी स्वार्थ अथवा अन्य कारणों से पत्रावली को बार-बार इधर-उधर भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह संघ का गंभीर आरोप है और इसकी वास्तविकता सामने लाने के लिए पत्रावली की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि पत्रावली संख्या 11770/11 को तत्काल तलब कर इसकी पूरी प्रक्रिया की जांच कराई जाए और यदि जांच में किसी अधिकारी की जानबूझकर लापरवाही, शासनादेश की अवहेलना अथवा अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि शासन स्तर से अनुमोदन होने के बाद भी कर्मचारियों को उनके वैधानिक लाभ के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। इससे पूरे प्रदेश के कर्मचारियों एवं अधिकारियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।

उन्होंने कहा कि कर्मचारी संगठन किसी अधिकारी के व्यक्तिगत विरोध में नहीं है, बल्कि कर्मचारियों के हित में निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध निर्णय की मांग कर रहा है, यदि किसी स्तर पर पत्रावली को जानबूझकर लंबित किया गया है तो उसकी जवाबदेही निर्धारित होना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग।

सुरेश सिंह यादव ने मुख्यमंत्री से मांग की कि इस पूरे प्रकरण में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए संबंधित पत्रावली की जांच कराई जाए तथा कर्मचारियों को 1900 ग्रेड-पे का लाभ दिए जाने के संबंध में नियमानुसार शीघ्र निर्णय कराया जाए।

उन्होंने कहा कि यदि इस मामले को शीघ्र संज्ञान में लेकर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो प्रदेश के कर्मचारी संगठन शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इसके तहत गांधी प्रतिमा, लखनऊ पर धरना-प्रदर्शन एवं ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। आंदोलन की अगली तिथि एवं कार्यक्रम की घोषणा संघ द्वारा शीघ्र की जाएगी।

यादव ने कहा कि प्रदेश के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों, वाहन चालकों तथा अन्य कर्मचारियों की कई समस्याएं लंबे समय से लंबित हैं। उन्होंने शासन द्वारा स्वीकृत रिक्त पदों पर नियमित भर्ती किए जाने, आउटसोर्सिंग व्यवस्था को समाप्त करने, पुरानी पेंशन बहाल करने, मृतक आश्रित नियुक्ति नियमावली के 14वें संशोधन पर पुनर्विचार करने तथा कोरोना काल के लंबित 18 माह के वेतन/भत्तों के संबंध में शीघ्र निर्णय किए जाने की मांग दोहराई।

उन्होंने कहा कि चतुर्थ श्रेणी एवं वाहन चालक के रिक्त पदों पर नियमित भर्ती होने से प्रदेश के गरीब एवं मध्यम वर्ग के युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। इसलिए सरकार को रिक्त पदों को भरने के साथ-साथ कर्मचारियों की लंबित मांगों पर भी समयबद्ध कार्रवाई करनी चाहिए।

सुरेश सिंह यादव ने कहा कि कर्मचारियों के हितों से जुड़े मामलों को अनिश्चितकाल तक लंबित रखना उचित नहीं है। यदि शासन स्तर पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेश के कर्मचारी एवं पदाधिकारी शांतिपूर्ण आंदोलन के माध्यम से अपनी आवाज बुलंद करेंगे और इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।

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