कैदियों के लिए इंटरनेट के मौलिक अधिकार को लागू करने की मांग

वरिष्ठ संवाददाता

अशोक सिंह नेगी

राजधानी/ लखनऊ

*कैदियों के लिए इंटरनेट के मौलिक अधिकार को लागू करने की मांग*
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*लखनऊ।* आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को एक प्रत्यावेदन भेजकर कैदियों के लिए नियंत्रित इंटरनेट उपयोग के मौलिक अधिकार को सुनिश्चित करने हेतु राष्ट्रीय स्तर पर नीति बनाए जाने की मांग की है। इसकी प्रति केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) को भी भेजी गई है।

अमिताभ ठाकुर ने Sunil Batra v. Delhi Administration (1978) में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित संवैधानिक सिद्धांतों तथा Narayansai Aasharam Harpalani v. State of Gujarat (2024) में गुजरात उच्च न्यायालय की टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि कारावास से किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकार समाप्त नहीं हो जाते और न ही इसके आधार पर मनमाना भेदभाव उचित ठहराया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का Just Rights for Children Alliance v. S. Harish & Ors. (15 अक्टूबर 2026) का निर्णय, जिसमें अनुच्छेद 21 तथा अनुच्छेद 19(1)(a) के अंतर्गत इंटरनेट तक पहुंच को मौलिक अधिकार माना गया है, कैदियों के लिए भी इस संवैधानिक संरक्षण को लागू करने का महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।

अमिताभ ठाकुर ने NHRC से देशभर की जेलों में इंटरनेट उपयोग संबंधी नीतियों की समीक्षा करने तथा कैदियों को कानूनसम्मत प्रतिबंधों के अधीन नियंत्रित इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय नीति की सिफारिश करने का आग्रह किया है।

उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय से भी इस संवैधानिक सिद्धांत को लागू करने के लिए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ समन्वय स्थापित करने की मांग की है।

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Date : 23 October 2026 Posted By : NEWS-DESK
कैदियों के लिए इंटरनेट के मौलिक अधिकार को लागू करने की मांग
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वरिष्ठ संवाददाता

अशोक सिंह नेगी

राजधानी/ लखनऊ

*कैदियों के लिए इंटरनेट के मौलिक अधिकार को लागू करने की मांग*
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*लखनऊ।* आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को एक प्रत्यावेदन भेजकर कैदियों के लिए नियंत्रित इंटरनेट उपयोग के मौलिक अधिकार को सुनिश्चित करने हेतु राष्ट्रीय स्तर पर नीति बनाए जाने की मांग की है। इसकी प्रति केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) को भी भेजी गई है।

अमिताभ ठाकुर ने Sunil Batra v. Delhi Administration (1978) में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित संवैधानिक सिद्धांतों तथा Narayansai Aasharam Harpalani v. State of Gujarat (2024) में गुजरात उच्च न्यायालय की टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि कारावास से किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकार समाप्त नहीं हो जाते और न ही इसके आधार पर मनमाना भेदभाव उचित ठहराया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का Just Rights for Children Alliance v. S. Harish & Ors. (15 अक्टूबर 2026) का निर्णय, जिसमें अनुच्छेद 21 तथा अनुच्छेद 19(1)(a) के अंतर्गत इंटरनेट तक पहुंच को मौलिक अधिकार माना गया है, कैदियों के लिए भी इस संवैधानिक संरक्षण को लागू करने का महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।

अमिताभ ठाकुर ने NHRC से देशभर की जेलों में इंटरनेट उपयोग संबंधी नीतियों की समीक्षा करने तथा कैदियों को कानूनसम्मत प्रतिबंधों के अधीन नियंत्रित इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय नीति की सिफारिश करने का आग्रह किया है।

उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय से भी इस संवैधानिक सिद्धांत को लागू करने के लिए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ समन्वय स्थापित करने की मांग की है।

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