धर्म परिवर्तन करने से जातिगत शोषण खत्म नहीं होता :CAM

वरिष्ठ संवाददाता

अशोक सिंह नेगी

राजधानी/ दिल्ली

*धर्म परिवर्तन करने से जातिगत शोषण खत्म नहीं होता :CAM*
___________________________

*लखनऊ/नई दिल्ली।* जाति उन्मूलन आंदोलन CAM ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले कि धर्म परिवर्तन करने से नहीं मिल सकता आरक्षण और अन्य सरकारी सुविधाएं पर घोर आश्चर्य व्यक्त किया। जाति उन्मूलन आंदोलन CAM का दृढ़ता से मानना है कि इस देश में जाति एक भयंकर सच्चाई है जो धर्म परिवर्तन करने से नहीं बदल जाता।सुप्रीम कोर्ट ने चेन्नई हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।जो फैसला तमिलनाडु सरकार के अपील के खिलाफ आया था।सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार कोई व्यक्ति अगर हिंदू धर्म से गैर हिंदू धर्म जैसे कि इस्लाम या क्रिश्चियन धर्म अपनाता है तो उसका सामाजिक पिछड़ापन और जातिगत शोषण खत्म हो जाता है।इसीलिए वह आरक्षण सहित अन्य सरकारी सुविधाएं नहीं प्राप्त कर सकता।

यह बहुत गलत और घोर जातिवादी फैसला है।भारत में न्यायपालिका पूरी तरह संघी मनुवादी फासीवादी ताकतों के इशारे पर नाच रही है।इस देश में व्यक्ति के धर्म परिवर्तन करने से उसकी जातिगत पहचान और उसके ऊपर हो रहे जातिगत उत्पीड़न खत्म नहीं होते।भारत और नेपाल में जाति एक भीषण सच्चाई है,जो कभी नहीं बदलती।हजारों सालों से ब्राह्मणवादी सनातनी शासक वर्ग ने मेहनतकश शूद्र अति शूद्रों के मेहनत की कमाई को हड़पने के लिए (अतिरिक्त मूल्य )क्रूर मनुस्मृति आधारित निर्मम वर्ण- जातिव्यवस्था का निर्माण किया था।इसी मनुस्मृति आधारित हिंदुत्व जिसका मर्म है निर्मम जातिव्यवस्था, को केंद्र में रख दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने फासीवादी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS, देशी विदेशी कॉरपोरेट घरानों द्वारा संचालित हिंदुराष्ट्र निर्माण के लिए पागलपन के जुनून से भिड़ा है।इस कथित हिंदुराष्ट्र का पवित्र संविधान , डॉक्टर आंबेडकर द्वारा निर्मित देश का संविधान नहीं बल्कि इनके लिए “पवित्र” मनुस्मृति होगा।मनुस्मृति के अनुसार तमाम शूद्र ,अति शूद्रों मतलब दलित, उत्पीड़ित वर्गों आदिवासियों, महिलाओं सहित देश की गरीब मेहनतकश जनता जो कि देश का करीब 85 प्रतिशत है,को इंसान का नहीं गुलाम का दर्जा मिलेगा।

जाति उन्मूलन आंदोलन के अनुसार न्यायपालिका के इस प्रकार के फैसले फासिस्ट संघ भाजपा के मनुस्मृति आधारित हिंदुराष्ट्र से प्रेरित है।साथ ही यह संघ परिवार के अंग जनजातीय सुरक्षा परिषद और वनवासी कल्याण आश्रम के लंबे समय से घोषित खतरनाक मांग कि हिंदू धर्म से धर्मांतरित लोगों खासकर आदिवासी ईसाइयों को डीलिस्टिंग कर तमाम सरकारी योजनाओं से वंचित किया जाए ,को मजबूत करते हैं।

जाति उन्मूलन आंदोलन CAM ने एक सच्चे लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष समतावादी भारत के निर्माण के लिए फासिस्ट RSS और उसके वैचारिक आधार मनुवादी हिंदुत्व के खिलाफ संघर्ष को तेज करते हुए जाति उन्मूलन आंदोलन को आगे बढ़ाने का आह्वान किया है।

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Date : 21 October 2026 Posted By : NEWS-DESK
धर्म परिवर्तन करने से जातिगत शोषण खत्म नहीं होता :CAM
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वरिष्ठ संवाददाता

अशोक सिंह नेगी

राजधानी/ दिल्ली

*धर्म परिवर्तन करने से जातिगत शोषण खत्म नहीं होता :CAM*
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*लखनऊ/नई दिल्ली।* जाति उन्मूलन आंदोलन CAM ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले कि धर्म परिवर्तन करने से नहीं मिल सकता आरक्षण और अन्य सरकारी सुविधाएं पर घोर आश्चर्य व्यक्त किया। जाति उन्मूलन आंदोलन CAM का दृढ़ता से मानना है कि इस देश में जाति एक भयंकर सच्चाई है जो धर्म परिवर्तन करने से नहीं बदल जाता।सुप्रीम कोर्ट ने चेन्नई हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।जो फैसला तमिलनाडु सरकार के अपील के खिलाफ आया था।सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार कोई व्यक्ति अगर हिंदू धर्म से गैर हिंदू धर्म जैसे कि इस्लाम या क्रिश्चियन धर्म अपनाता है तो उसका सामाजिक पिछड़ापन और जातिगत शोषण खत्म हो जाता है।इसीलिए वह आरक्षण सहित अन्य सरकारी सुविधाएं नहीं प्राप्त कर सकता।

यह बहुत गलत और घोर जातिवादी फैसला है।भारत में न्यायपालिका पूरी तरह संघी मनुवादी फासीवादी ताकतों के इशारे पर नाच रही है।इस देश में व्यक्ति के धर्म परिवर्तन करने से उसकी जातिगत पहचान और उसके ऊपर हो रहे जातिगत उत्पीड़न खत्म नहीं होते।भारत और नेपाल में जाति एक भीषण सच्चाई है,जो कभी नहीं बदलती।हजारों सालों से ब्राह्मणवादी सनातनी शासक वर्ग ने मेहनतकश शूद्र अति शूद्रों के मेहनत की कमाई को हड़पने के लिए (अतिरिक्त मूल्य )क्रूर मनुस्मृति आधारित निर्मम वर्ण- जातिव्यवस्था का निर्माण किया था।इसी मनुस्मृति आधारित हिंदुत्व जिसका मर्म है निर्मम जातिव्यवस्था, को केंद्र में रख दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने फासीवादी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS, देशी विदेशी कॉरपोरेट घरानों द्वारा संचालित हिंदुराष्ट्र निर्माण के लिए पागलपन के जुनून से भिड़ा है।इस कथित हिंदुराष्ट्र का पवित्र संविधान , डॉक्टर आंबेडकर द्वारा निर्मित देश का संविधान नहीं बल्कि इनके लिए "पवित्र" मनुस्मृति होगा।मनुस्मृति के अनुसार तमाम शूद्र ,अति शूद्रों मतलब दलित, उत्पीड़ित वर्गों आदिवासियों, महिलाओं सहित देश की गरीब मेहनतकश जनता जो कि देश का करीब 85 प्रतिशत है,को इंसान का नहीं गुलाम का दर्जा मिलेगा।

जाति उन्मूलन आंदोलन के अनुसार न्यायपालिका के इस प्रकार के फैसले फासिस्ट संघ भाजपा के मनुस्मृति आधारित हिंदुराष्ट्र से प्रेरित है।साथ ही यह संघ परिवार के अंग जनजातीय सुरक्षा परिषद और वनवासी कल्याण आश्रम के लंबे समय से घोषित खतरनाक मांग कि हिंदू धर्म से धर्मांतरित लोगों खासकर आदिवासी ईसाइयों को डीलिस्टिंग कर तमाम सरकारी योजनाओं से वंचित किया जाए ,को मजबूत करते हैं।

जाति उन्मूलन आंदोलन CAM ने एक सच्चे लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष समतावादी भारत के निर्माण के लिए फासिस्ट RSS और उसके वैचारिक आधार मनुवादी हिंदुत्व के खिलाफ संघर्ष को तेज करते हुए जाति उन्मूलन आंदोलन को आगे बढ़ाने का आह्वान किया है।

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