वरिष्ठ संवाददाता
दिलीप सिंह रावत
राजधानी/ लखनऊ
*अधिकारियों की संवेदनहीनता बन रही आंदोलन का कारण :तिवारी*
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➡👉*2 वर्ष से मुख्य सचिव ने नहीं किया है कोई संवाद*
👉*मुख्यमंत्री भी नहीं ले रहे हैं कर्मचारियों की समस्याओं का संज्ञान*
👉*20 जनवरी को होगा विधानसभा पर धरना प्रदर्शन*
*लखनऊ*। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने आज लखनऊ में संयुक्त परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ ऑनलाइन वार्ता कर आंदोलन की स्थिति की समीक्षा किया। उन्होंने अवगत कराया है कि शासन स्तर पर कर्मचारियों की मांगों की लगातार उपेक्षा हो रही है। मुख्य सचिव, प्रमुख कार्मिक, अपर मुख्य सचिव वित्त एवं विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव एवं सचिव कर्मचारी संगठनों के साथ वार्ता नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण आंदोलन की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कर्मचारियों की समस्याओं का संज्ञान लेने के लिए मुख्यमंत्री जी को भी लिखे गए दर्जनों पत्रों का कोई संज्ञान नहीं लिया गया है।
*मुख्य मांगे*
पुरानी पेंशन की बहाली,
मुख्य सचिव समिति के माध्यम से वेतन विसंगतियों पर निर्णय,
रिक्त पदों को भरा जाना,
समय से पदोन्नतियां किया जाना,
आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए गठित निगम की सुविधा आउटसोर्स कर्मचारियों को दिया जाना।
2001 के बाद राजकीय विभागों में नियुक्त संविदा कर्मचारियों को नियमित करने के लिए नियमावली बनाया जाना, इत्यादि मांगे उच्च स्तर पर हस्तक्षेप नहीं होने के कारण लंबित हैं। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने 21 सितंबर को मुख्य सचिव को नोटिस भेज कर 20 नवंबर से आंदोलन की चेतावनी दिया है, लेकिन शासन स्तर पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद से संबद्ध संगठन अपनी मांगों को लेकर पहले से ही आंदोलन पर हैं। प्रदेश में कार्यरत 2 लाख से अधिक आशा बहुएं इको गार्डन से लेकर प्रत्येक जनपद में धरना प्रदर्शन कर अपना विरोध प्रकट कर रही हैं। एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत लाखों कर्मचारी लगातार इको गार्डन पर धरना दे रहे हैं। सरकार के खिलाफ कर्मचारियों ने मोर्चा खोल रखा है। लेकिन फिर भी सरकार के ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारी मुख्यमंत्री जी को गुमराह कर रहे हैं। प्रजातंत्र में संवाद हीनता के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए लेकिन वर्तमान सरकार में अफसरशाही हॉबी है। प्रजातंत्र कोने में पड़ा आंसू बहा रहा है।
2009 से 2024 तक अकेले राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के साथ तत्कालीन मुख्य सचिव एवं प्रमुख सचिव कार्मिक के साथ 100 से अधिक वार्ताएं हुई हैं जिनमें से 51 के कार्यवृत्त संयुक्त परिषद ने मुख्य सचिव को भेज कर निवर्तमान अधिकारियों एवं कर्मचारी संगठनों के बीच सामंजस्य एवं गुड गवर्नेंस की परंपरा का स्मरण कराया है।
2012 में मुख्य सचिव द्वारा निर्गत एक शासनादेश के तहत सेवा संवर्गों की समस्याओं के निराकरण के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं, का उल्लेख करते हुए संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने अवगत कराया है कि पहले के मुख्य सचिव के आदेशों में कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता झलकती थी, जबकि विगत दो वर्षों से मुख्य सचिव के किसी भी आदेश में कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का अभाव दिखाई पड़ रहा है। चुनावी वर्ष है, ऐसे में कर्मचारियों की नाराजगी सरकार को भारी पड़ सकती है।
संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में कर्मचारियों की कुल संख्या 50 लाख के आसपास है और कर्मचारियों के पास 2 करोड़ के आसपास मतदान की शक्ति है। सरकार कर्मचारियों की शक्ति को कमतर करके आंक रही है।
कर्मचारी अनुशासित रहकर सरकार की छवि को जनता तक पहुंचाने में अपनी अहम भूमिका निभाता है, लेकिन अधिकारियों की तानाशाही के चलते कर्मचारियों का उत्पीड़न बढ़ गया है जिसके कारण कर्मचारी सरकार से नाराज है।
कर्मचारी संगठनों के सचिवालय में प्रवेश पर पूर्णता रोक लगा दी गई है, जबकि प्रतिदिन हजारों की संख्या में आम आदमी सचिवालय में प्रवेश करता है। 2012 के आदेश में मुख्य सचिव ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिए थे कि कर्मचारियों की समस्याओं पर त्वरित गति से कार्यवाही की जानी चाहिए तथा यह महसूस भी कराया जाना चाहिए कि सरकार उनकी समस्याओं के निदान के लिए तत्पर है, ताकि कर्मचारियों का मनोबल ऊंचा रहे। लेकिन वर्तमान में अधिकारी कर्मचारियों का मनोबल तोड़ने का कार्य कर रहे हैं। संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने स्पष्ट किया है कि संयुक्त परिषद का आंदोलन निर्णायक होगा।
20 नवंबर को जनपद स्तर पर धरना प्रदर्शन किया जा रहा है ,16 दिसंबर को मंडल आयुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन करके ज्ञापन दिया जाएगा तथा 20 जनवरी को लखनऊ की सड़कों पर कर्मचारियों का सैलाब उमड़ेगा और यह सब मौजूदा सरकार में हॉबी अफसरशाही के चलते होने जा रहा है।
संयुक्त परिषद ने मुख्यमंत्री जी से हस्तक्षेप की मांग किया है। आज की ऑनलाइन बैठक में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने संयुक्त परिषद की महामंत्री अरुणा शुक्ला, कार्य अध्यक्ष टी एन चौरसिया,वरिष्ठ उपाध्यक्ष नारायण दुबे ,सलाहकार समिति की सदस्य निरंजन कुमार श्रीवास्तव, ओमप्रकाश गौड़, ओमप्रकाश पांडे,रामेश्वर पांडे, बृजभूषण मिश्रा, हरिवंश मणि त्रिपाठी, डी के त्रिपाठी, संयुक्त परिषद के उपाध्यक्ष शिवाकांत द्विवेदी, उमानाथ तिवारी, आदित्य नारायण झा, हर्ष कुमार, अयोध्या प्रसाद सिंह, वीरेंद्र वीर यादव, राजेंद्र पाल, हेमंत पाठक, अतुल कुमार सिंह , कुसुम लता यादव, लक्ष्मी सोनकर एवं दर्जनों पदाधिकारियों के साथ विचार विमर्श कर आंदोलन को सफल बनाने की तैयारी की समीक्षा किया।




