विशेष रिपोर्ट
अनुराग सिंह बिष्ट
उत्तर प्रदेश/ वाराणसी
*वाराणसी में डिजिटल लूट के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार! तीन ठिकानों पर छापेमारी, 6 SIM BOX बरामद; 25 लाख की ठगी के तार जुड़े, दो गिरफ्तार—कथित मास्टरमाइंड फरार!*
*वाराणसी |* वाराणसी में साइबर ठगों के खतरनाक नेटवर्क पर पुलिस ने बड़ा प्रहार किया है। डिजिटल अरेस्ट जैसी साइबर ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे *SIM Box रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने तीन ठिकानों पर छापेमारी कर छह SIM Box और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।* कार्रवाई में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड सौगात अस्थाना फरार बताया जा रहा है।
पुलिस की जांच में इस नेटवर्क के तार पुणे की एक महिला से कथित डिजिटल अरेस्ट के जरिए हुई *25 लाख रुपये की ठगी* से जुड़ने की बात सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस फरार आरोपी की तलाश और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
*तीन इलाकों में किराए के मकान बने साइबर नेटवर्क के ठिकाने!*
पुलिस कमिश्नर *मोहित अग्रवाल* के निर्देशन में साइबर क्राइम सेल, प्रतिसार टीम और थाना चितईपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने 14 अक्टूबर को शहर के तीन अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की।
कार्रवाई के दौरान इन स्थानों से उपकरण बरामद किए गए—
*• अशोकपुरम, एकता नगर, शिवपुर*
*• बालाजी भवन, सामनेघाट, लंका*
*• कैलाशपुरी कॉलोनी, चितईपुर*
पुलिस के मुताबिक, इन ठिकानों से कुल छह SIM Box बरामद हुए, जिनमें 192 सिम स्लॉट बताए गए हैं। इसके अतिरिक्त राउटर, वीपीएन गेटवे और नेटवर्क संचालन में इस्तेमाल होने वाले अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए हैं।
*दो गिरफ्तार, कथित मास्टरमाइंड की तलाश तेज!*
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है—
*• मोहम्मद आबिद (40 वर्ष)* — निवासी सराय हरहा, चौक।
*• शशि शेखर सिंह (24 वर्ष)* — निवासी नवापुरा, दारानगर।
वहीं, लखनऊ निवासी *सौगात अस्थाना* को इस नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड बताया गया है। वह फिलहाल फरार है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है और नेटवर्क के अन्य संभावित सदस्यों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
*💰 41 साइबर शिकायतों से जुड़ा म्यूल बैंक खाता, 25 लाख की ठगी का खुलासा!*
*डीसीपी साइबर नीतू कादयान* के अनुसार, प्रतिबिंब पोर्टल पर संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जांच के दौरान पुलिस को एक म्यूल बैंक खाते का पता चला। जांच में इस खाते से देशभर की *41 साइबर शिकायतें* जुड़ी मिलीं।
इन्हीं शिकायतों में पुणे की एक महिला से कथित डिजिटल अरेस्ट के जरिए 25 लाख रुपये की ठगी का मामला भी शामिल बताया गया है। पुलिस अब बैंक खाते, मोबाइल नंबरों और बरामद तकनीकी उपकरणों के जरिए पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
*📱 SIM Box से कैसे चलाया जाता था ठगी का खेल?*
प्रारंभिक जांच के मुताबिक, आरोपी कथित तौर पर SIM-Over-IP तकनीक का इस्तेमाल कर विदेशी कॉल को भारतीय स्थानीय मोबाइल नंबरों के जरिए प्रदर्शित करते थे। इस तकनीक का दुरुपयोग करके कॉल करने वाले की वास्तविक पहचान और विदेशी कनेक्शन छिपाने की कोशिश की जा सकती है।
इसी तरह के नेटवर्क का इस्तेमाल साइबर अपराधी पुलिस अधिकारी, जांच एजेंसी या सरकारी कर्मचारी बनकर लोगों को डराने और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर पैसे ऐंठने के लिए कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में बरामद उपकरणों का वास्तविक इस्तेमाल और आरोपियों की भूमिका जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।
*⚖️ BNS और IT Act के तहत मुकदमा दर्ज*
इस मामले में थाना चितईपुर में *मुकदमा संख्या 256/2026* दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66D के तहत कार्रवाई की है।
फिलहाल पुलिस बरामद उपकरणों की जांच, संदिग्ध मोबाइल नंबरों की पड़ताल, बैंक खातों के लेन-देन और फरार आरोपी की तलाश में जुटी है।
*साइबर अपराधियों को बड़ा झटका!*
वाराणसी पुलिस की यह कार्रवाई साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले तकनीकी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता मानी जा रही है। तीन ठिकानों पर छापेमारी, छह SIM Box की बरामदगी और 41 साइबर शिकायतों से जुड़े बैंक खाते की जानकारी सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है।
*अब सबसे बड़ा सवाल—क्या इस नेटवर्क के पीछे और भी चेहरे छिपे हैं, और क्या जांच से देशभर में फैले साइबर ठगी के बड़े गिरोह का पर्दाफाश होगा?* पुलिस की आगे की जांच से कई अहम खुलासे होने की उम्मीद है।




