वरिष्ठ संवाददाता
अमित सिंह बिष्ट
उत्तर प्रदेश/ जौनपुर
*जौनपुर में एक्सपायरी कैंपा का बड़ा मामला! 10 ट्रक माल के निस्तारण पर उठे सवाल, नाबालिगों से काम कराने के आरोप से मचा हड़कंप*
*जौनपुर।* जलालपुर थाना क्षेत्र के महरेव में एक्सपायरी कैंपा कोल्ड ड्रिंक की करीब 10 ट्रक खेप नष्ट किए जाने का मामला अब जिला प्रशासन के संज्ञान में पहुंच गया है। इतनी बड़ी मात्रा में एक्सपायरी पेय पदार्थ कहां से लाया गया और उसे नष्ट करने में निर्धारित नियमों का पालन किया गया या नहीं, इन सवालों की जांच के लिए कई विभागों की टीमें गठित की गई हैं। *जिलाधिकारी सैमुअल पाल एन.* के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा विभाग, श्रम विभाग और केराकत के उपजिलाधिकारी समेत संबंधित अधिकारी मामले की पड़ताल में जुटे हैं। वहीं, नाबालिग बच्चों से बोतलें नष्ट कराने के आरोप ने पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया है।
*महरेव में 10 ट्रक एक्सपायरी कैंपा! आखिर किसके निर्देश पर हुआ निस्तारण?*
महरेव में एक मकान के पास बड़ी संख्या में एक्सपायरी कैंपा कोल्ड ड्रिंक की बोतलों को नष्ट किए जाने का मामला सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 10 ट्रक माल के निस्तारण की चर्चा है। अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि इतनी बड़ी खेप कहां से आई, इसे महरेव में ही नष्ट करने का निर्णय किसने लिया और इसके लिए किन नियमों व निर्देशों का पालन किया गया।
जानकारी के मुताबिक, माल को वाराणसी अथवा कंपनी के दिल्ली स्थित मुख्यालय में नष्ट कराने से संबंधित निर्देश होने की बात भी कही जा रही है। हालांकि, इन दावों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और अधिकारियों की जांच के बाद ही हो सकेगी।
*नाबालिगों से काम कराने का आरोप, श्रम विभाग करेगा पड़ताल*
मामले में नाबालिग बच्चों से एक्सपायरी बोतलों को नष्ट कराने का आरोप भी सामने आया है। यदि जांच में आरोप की पुष्टि होती है, तो बाल श्रम से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई का सवाल उठेगा।
इसके साथ ही जांच टीम यह भी देखेगी कि एक्सपायरी पेय पदार्थों और उनकी बोतलों का निस्तारण किस तरीके से किया जा रहा था। नियमों के विपरीत निस्तारण से पर्यावरण और आसपास के लोगों की सुरक्षा पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की भी पड़ताल जरूरी होगी।
*स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी सवाल*
इस प्रकरण में स्थानीय पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि संबंधित व्यक्ति को थाने लाए जाने के बाद छोड़ दिया गया था। हालांकि, पुलिस ने किन परिस्थितियों में कार्रवाई की और मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी, इसकी पुष्टि जांच के दौरान ही हो सकेगी।
प्रशासनिक जांच में इस पहलू को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, ताकि शिकायत सामने आने से लेकर आगे की कार्रवाई तक पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सके।
*डीएम के संज्ञान के बाद कई विभाग सक्रिय*
*जिलाधिकारी सैमुअल पाल एन.* के संज्ञान में मामला आने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग, श्रम विभाग और केराकत के उपजिलाधिकारी समेत संबंधित अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी सौंपे जाने की जानकारी है।
जांच के दौरान माल की आपूर्ति, भंडारण, निस्तारण की अनुमति और अपनाई गई प्रक्रिया से संबंधित तथ्यों की पड़ताल की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कहीं नियमों की अनदेखी तो नहीं की गई।
*जांच रिपोर्ट खोलेगी पूरे मामले की परतें*
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक्सपायरी कैंपा की इतनी बड़ी खेप महरेव तक कैसे पहुंची और उसे नष्ट करने की अनुमति किसने दी? क्या निस्तारण निर्धारित प्रक्रिया के तहत हुआ और क्या वास्तव में नाबालिग बच्चों से काम कराया गया? इन सभी सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएंगे।
**फिलहाल, प्रशासनिक जांच पर सबकी निगाहें टिकी हैं।** जांच में यदि नियमों के उल्लंघन या बाल श्रम के आरोपों की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन इस पूरे प्रकरण में किसकी जिम्मेदारी तय करता है।
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