ब्यूरो रिपोर्ट
अमित सिंह बिष्ट
राजधानी/ लखनऊ/ शहीद स्मारक
शहीद-ए-आज़म भगत सिंह की 119वीं जयंती पर जश्न-ए-आज़ादी फाउंडेशन ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
शहीद स्मारक पर माल्यार्पण कर लिया राष्ट्र निर्माण का संकल्प, गूंजे ‘इंकलाब ज़िंदाबाद’ के नारे
लखनऊ। “क्रांति की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है” — शहीद-ए-आज़म सरदार भगत सिंह का यह अमर संदेश आज भी देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत है। उनकी 119वीं जयंती के अवसर पर जश्न-ए-आज़ादी फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने शहीद स्मारक पहुंचकर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया, पुष्प अर्पित किए और उनके अद्वितीय बलिदान को नमन करते हुए राष्ट्र की एकता, अखंडता और प्रगति के लिए संकल्प लिया।इस अवसर पर फाउंडेशन के पदाधिकारी मुर्तज़ा अली, अब्दुल वहीद, वामिक ख़ान, तंजीम और अमान सहित अन्य सदस्यों ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भगत सिंह केवल इतिहास के एक महान क्रांतिकारी नहीं, बल्कि आज भी भारत की चेतना में जीवित एक अमर विचारधारा हैं।माहौल उस समय और अधिक भावुक हो उठा जब उपस्थित लोगों ने “इंकलाब ज़िंदाबाद” और “शहीदों अमर रहो” के नारों के साथ महान क्रांतिकारी को याद किया।28 सितंबर 1907 को पंजाब के बंगा गांव (वर्तमान पाकिस्तान) में जन्मे सरदार भगत सिंह बचपन से ही देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत थे। जलियांवाला बाग हत्याकांड ने उनके बाल मन को झकझोर दिया और उन्होंने कम उम्र में ही भारत की आज़ादी को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया।23 मार्च 1931 को अपने साथी सुखदेव और राजगुरु के साथ मात्र 23 वर्ष की आयु में हंसते-हंसते फांसी का फंदा चूमकर उन्होंने पूरे देश को यह संदेश दिया कि मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान ही सच्ची देशभक्ति है।भगत सिंह केवल हथियार उठाने वाले क्रांतिकारी नहीं थे, बल्कि वे एक गहरे चिंतक, लेखक और समाज सुधारक भी थे। वे ऐसे भारत का सपना देखते थे जहां धर्म, जाति और गरीबी के आधार पर कोई भेदभाव न हो और हर नागरिक समान अधिकारों के साथ सम्मानपूर्ण जीवन जी सके।
इस अवसर पर फाउंडेशन के पदाधिकारी मुर्तज़ा अली ने कहा कि
“सरदार भगत सिंह का जीवन हमें सिखाता है कि देशभक्ति केवल भावनाओं का विषय नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाने का संकल्प है। मात्र 23 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने प्राण न्योछावर कर यह साबित कर दिया कि विचारों की शक्ति किसी भी साम्राज्य की नींव हिला सकती है। आज उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम शिक्षा, सामाजिक एकता और राष्ट्रहित को अपने जीवन का उद्देश्य बनाएं तथा उनके सपनों का भारत बनाने में अपना योगदान दें।”लोगों को संबोधित करते हुए अब्दुल वहीद ने कहा,
“भगत सिंह केवल एक नाम नहीं, बल्कि जागृत चेतना का प्रतीक हैं। जलियांवाला बाग की त्रासदी ने उनके भीतर जो आग जगाई, उसने पूरे देश के युवाओं को आज़ादी की लड़ाई में नई ऊर्जा दी। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि ‘बम और पिस्तौल क्रांति नहीं लाते, क्रांति की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है।’ उनका जीवन हमें बताता है कि असली क्रांति समाज में समानता, न्याय और भाईचारे की स्थापना से आती है।”»इस मौके पर वामिक ख़ान ने कहा,”शहीद-ए-आज़म भगत सिंह का व्यक्तित्व साहस, ज्ञान और त्याग का अद्भुत संगम था। वे जितने निर्भीक क्रांतिकारी थे, उतने ही प्रखर लेखक और दूरदर्शी विचारक भी थे। उनका सपना ऐसा भारत था जहां हर नागरिक बिना किसी भेदभाव के सम्मानपूर्वक जीवन जी सके। आज के युवाओं को उनके विचारों को केवल पढ़ना नहीं, बल्कि अपने आचरण में उतारना होगा, क्योंकि राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी ताकत जागरूक और शिक्षित युवा ही होते हैं।”कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने शहीद-ए-आज़म भगत सिंह की स्मृति में पुष्प वर्षा कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और संकल्प लिया कि वे देश की एकता, अखंडता, सामाजिक सौहार्द और शिक्षित एवं सशक्त भारत के निर्माण के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे।”शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा।”




