इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: यूपी में सार्वजनिक भूमि से 90 दिन में हटेगा अतिक्रमण, लापरवाह प्रधान और लेखपाल पर होगी आपराधिक कार्रवाई

विशेष रिपोर्ट

अनुराग सिंह बिष्ट

उत्तर प्रदेश/ प्रयागराज

इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: यूपी में सार्वजनिक भूमि से 90 दिन में हटेगा अतिक्रमण, लापरवाह प्रधान और लेखपाल पर होगी आपराधिक कार्रवाई!

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में ग्राम सभा, ग्राम पंचायत और सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर अवैध कब्जों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की एकलपीठ ने राज्यभर के जिलाधिकारियों और उपजिलाधिकारियों को अतिक्रमण हटाने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

ग्राम प्रधान और लेखपाल की भी तय होगी जिम्मेदारी

अदालत ने स्पष्ट किया कि ग्राम प्रधान, भू-प्रबंधक समिति के अध्यक्ष तथा लेखपाल, समिति के सचिव के रूप में ग्राम पंचायत की संपत्ति की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार हैं।

यदि सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण होने के बावजूद ग्राम प्रधान या लेखपाल इसकी सूचना संबंधित तहसीलदार को नहीं देते हैं अथवा सूचना देने में अनावश्यक देरी करते हैं, तो उनके खिलाफ विभागीय और आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है।

BNS की धारा 316 के तहत आपराधिक कार्रवाई के निर्देश

हाईकोर्ट ने संबंधित परिस्थितियों में ग्राम प्रधान और लेखपाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 316 के तहत आपराधिक विश्वासघात के साथ-साथ षड्यंत्र और दुष्प्रेरण से संबंधित कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

इसके अतिरिक्त ग्राम प्रधान के विरुद्ध उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा 95(1)(g)(iii) के तहत पद से हटाने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

तहसीलदार को 90 दिन की समयसीमा

अदालत ने निर्देश दिया कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 के तहत जारी कारण बताओ नोटिस के बाद अतिक्रमण संबंधी कार्यवाही 90 दिनों के भीतर पूरी करने का प्रयास किया जाए।

यदि तहसीलदार या तहसीलदार (न्यायिक) पर्याप्त कारण दर्ज किए बिना निर्धारित समय में कार्यवाही पूरी नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल बेदखली का आदेश पारित करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि मौके से वास्तविक अतिक्रमण हटाकर सार्वजनिक भूमि को उसके मूल स्वरूप में बहाल करना जरूरी है।

पुलिस को भी दिए निर्देश

हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में राजस्व अधिकारियों को पूरा सहयोग दें और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराएं।

अदालत ने कहा कि तालाब, जलाशय और अन्य सार्वजनिक उपयोग की जमीनों पर अवैध कब्जा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

यह आदेश मिर्जापुर जिले के चुनार तहसील के चौका गांव में तालाब पर अतिक्रमण से संबंधित जनहित याचिका पर पारित किया गया।

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Date : 08 November 2026 Posted By : NEWS-DESK
इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: यूपी में सार्वजनिक भूमि से 90 दिन में हटेगा अतिक्रमण, लापरवाह प्रधान और लेखपाल पर होगी आपराधिक कार्रवाई
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अनुराग सिंह बिष्ट

उत्तर प्रदेश/ प्रयागराज

इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: यूपी में सार्वजनिक भूमि से 90 दिन में हटेगा अतिक्रमण, लापरवाह प्रधान और लेखपाल पर होगी आपराधिक कार्रवाई!

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में ग्राम सभा, ग्राम पंचायत और सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर अवैध कब्जों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की एकलपीठ ने राज्यभर के जिलाधिकारियों और उपजिलाधिकारियों को अतिक्रमण हटाने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

ग्राम प्रधान और लेखपाल की भी तय होगी जिम्मेदारी

अदालत ने स्पष्ट किया कि ग्राम प्रधान, भू-प्रबंधक समिति के अध्यक्ष तथा लेखपाल, समिति के सचिव के रूप में ग्राम पंचायत की संपत्ति की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार हैं।

यदि सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण होने के बावजूद ग्राम प्रधान या लेखपाल इसकी सूचना संबंधित तहसीलदार को नहीं देते हैं अथवा सूचना देने में अनावश्यक देरी करते हैं, तो उनके खिलाफ विभागीय और आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है।

BNS की धारा 316 के तहत आपराधिक कार्रवाई के निर्देश

हाईकोर्ट ने संबंधित परिस्थितियों में ग्राम प्रधान और लेखपाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 316 के तहत आपराधिक विश्वासघात के साथ-साथ षड्यंत्र और दुष्प्रेरण से संबंधित कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

इसके अतिरिक्त ग्राम प्रधान के विरुद्ध उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा 95(1)(g)(iii) के तहत पद से हटाने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

तहसीलदार को 90 दिन की समयसीमा

अदालत ने निर्देश दिया कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 के तहत जारी कारण बताओ नोटिस के बाद अतिक्रमण संबंधी कार्यवाही 90 दिनों के भीतर पूरी करने का प्रयास किया जाए।

यदि तहसीलदार या तहसीलदार (न्यायिक) पर्याप्त कारण दर्ज किए बिना निर्धारित समय में कार्यवाही पूरी नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल बेदखली का आदेश पारित करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि मौके से वास्तविक अतिक्रमण हटाकर सार्वजनिक भूमि को उसके मूल स्वरूप में बहाल करना जरूरी है।

पुलिस को भी दिए निर्देश

हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में राजस्व अधिकारियों को पूरा सहयोग दें और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराएं।

अदालत ने कहा कि तालाब, जलाशय और अन्य सार्वजनिक उपयोग की जमीनों पर अवैध कब्जा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

यह आदेश मिर्जापुर जिले के चुनार तहसील के चौका गांव में तालाब पर अतिक्रमण से संबंधित जनहित याचिका पर पारित किया गया।

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