और काल की भेंट चढ़ गया रावण अतंत वह घड़ी आ ही गई जिसका समय और काल को इंतजार था जिस पल के लिए देवताओं में बेकरारी थी

वरिष्ठ संवाददाता

अमित सिंह बिष्ट

उत्तर प्रदेश/ वाराणसी/ रामनगर

…और काल की भेंट चढ़ गया रावण!

अतंत वह घड़ी आ ही गई जिसका समय और काल को इंतजार था। जिस पल के लिए देवताओं में बेकरारी थी। जिसके लिए श्री राम वन आए थे और जिस पल का युगों युगों से सबको इंतजार था। रावण के अहंकार ने तो उसका सर्वस्व छीन ही लिया था। रोने को भी कोई नही बचा था।

रामलीला के छब्बीसवें दिन के प्रसंग में रावण अपने सारथी को डांटता है कि तुमने मेरा रणभूमि छुड़ाया। वह युद्ध करता है और कई तरह का माया दिखाता है। यह सब देख विभीषण श्री राम को रावण की नाभि में तीर मारने को कहते हैं। श्रीराम उसके नाभि में तीर मारते हैं और रावण के प्राण पखेरू उड़ जाते हैं। विभीषण रावण की मृत्यु पर विलाप करते हैं। श्री राम विभीषण से शोक छोड़ रावण की अंत्येष्टि करने को कहते हैं। विभीषण रावण को मुखाग्नि देते हैं। रावण का शरीर धू-धू कर जलता है और राख हो जाता है। उसकी आत्मा उसका शरीर छोड़ दूसरे दुनिया का रुख पकड़ लेती है।

इसी के साथ पूरा माहौल राममय हो जाता है। चारों ओर श्री राम की जय जयकार होने लगती है। यहीं पर आज की आरती होती है।

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Date : 21 October 2026 Posted By : NEWS-DESK
और काल की भेंट चढ़ गया रावण अतंत वह घड़ी आ ही गई जिसका समय और काल को इंतजार था जिस पल के लिए देवताओं में बेकरारी थी
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वरिष्ठ संवाददाता

अमित सिंह बिष्ट

उत्तर प्रदेश/ वाराणसी/ रामनगर

...और काल की भेंट चढ़ गया रावण!

अतंत वह घड़ी आ ही गई जिसका समय और काल को इंतजार था। जिस पल के लिए देवताओं में बेकरारी थी। जिसके लिए श्री राम वन आए थे और जिस पल का युगों युगों से सबको इंतजार था। रावण के अहंकार ने तो उसका सर्वस्व छीन ही लिया था। रोने को भी कोई नही बचा था।

रामलीला के छब्बीसवें दिन के प्रसंग में रावण अपने सारथी को डांटता है कि तुमने मेरा रणभूमि छुड़ाया। वह युद्ध करता है और कई तरह का माया दिखाता है। यह सब देख विभीषण श्री राम को रावण की नाभि में तीर मारने को कहते हैं। श्रीराम उसके नाभि में तीर मारते हैं और रावण के प्राण पखेरू उड़ जाते हैं। विभीषण रावण की मृत्यु पर विलाप करते हैं। श्री राम विभीषण से शोक छोड़ रावण की अंत्येष्टि करने को कहते हैं। विभीषण रावण को मुखाग्नि देते हैं। रावण का शरीर धू-धू कर जलता है और राख हो जाता है। उसकी आत्मा उसका शरीर छोड़ दूसरे दुनिया का रुख पकड़ लेती है।

इसी के साथ पूरा माहौल राममय हो जाता है। चारों ओर श्री राम की जय जयकार होने लगती है। यहीं पर आज की आरती होती है।

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