विशेष रिपोर्ट
अनुराग सिंह बिष्ट
उत्तर प्रदेश/ प्रयागराज
*इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला यूपी में सरकारी जमीनों पर बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी! 90 दिन में हटेगा अतिक्रमण, प्रधान-लेखपाल भी नपेंगे*
*प्रयागराज/लखनऊ।* उत्तर प्रदेश में ग्राम सभा और सार्वजनिक उपयोग की जमीनों पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का रास्ता साफ हो गया है। *इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सार्वजनिक भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।* अदालत ने साफ किया है कि सरकारी जमीनों की सुरक्षा में लापरवाही बरतने वाले ग्राम प्रधान, लेखपाल और संबंधित राजस्व अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
*न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि* ने जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए निर्देश दिया कि *सार्वजनिक संपत्ति पर अवैध कब्जे* की जानकारी मिलने के बाद निर्धारित समयसीमा में कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाए।
*60 दिन में रिपोर्ट, 90 दिन में कार्रवाई!*
हाईकोर्ट के निर्देशों के मुताबिक, ग्राम सभा की जमीन पर अतिक्रमण की जानकारी मिलने पर ग्राम प्रधान और लेखपाल को उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता नियमावली, 2016 के नियम 66 के तहत संबंधित तहसीलदार या तहसीलदार (न्यायिक) को *60 दिनों के भीतर सूचना देनी होगी।*
इसके बाद उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी होने पर तहसीलदार को *90 दिनों के भीतर अतिक्रमण संबंधी कार्यवाही पूरी करनी होगी।* पर्याप्त कारण के बिना देरी होने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
*⚖️ प्रधान और लेखपाल की भी तय होगी जवाबदेही*
अदालत ने ग्राम प्रधान और लेखपाल की जिम्मेदारियों को रेखांकित करते हुए कहा कि सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा में लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अतिक्रमण की जानकारी अधिकारियों तक नहीं पहुंचाने या नियमानुसार कार्रवाई नहीं करने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक विभागीय और आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है।
मामले की परिस्थितियों के अनुसार ग्राम प्रधान को पद से हटाने की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा सकता है। यानी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के मामलों में केवल कब्जाधारियों ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाने में विफल अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी।
*🚔 अतिक्रमण हटाने में पुलिस भी करेगी सहयोग*
हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को राजस्व विभाग की कार्रवाई में आवश्यक सहयोग देने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही शिकायतकर्ता को कार्रवाई की जानकारी देने तथा प्रत्येक चरण में सुनवाई का अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।
*आदेश की अनदेखी पर अवमानना की कार्यवाही का रास्ता*
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत जरूरी सूचना नहीं देने और सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण बने रहने की स्थिति में संबंधित ग्राम प्रधान और लेखपाल के विरुद्ध हाईकोर्ट में दीवानी अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का रास्ता खुला रह सकता है।
*अब सरकारी और ग्राम सभा की जमीनों पर अवैध कब्जे के मामलों में समयसीमा के भीतर कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही अहम होगी।* हालांकि, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई संबंधित कानून, निर्धारित प्रक्रिया और प्रभावित पक्ष को सुनवाई का अवसर देने के अनुरूप ही की जाएगी।
प्रधान संपादक विशेष रिपोर्ट




