नाना पाटेकर ने गोवा में जिंदगी और मौत पर की बात, बोले- मैं आज हूं, कल नहीं रहूंगा

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अपनी बेबाक बातों और दमदार अभिनय के लिए जाने जाते हैं। उनके विचार अक्सर जिंदगी, रिश्तों और समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारियों पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं। गोवा में एक पर्यटन कार्यक्रम के दौरान दिए गए उनके भाषण का जिक्र भी इसी संदर्भ में किया जा रहा है।

कार्यक्रम में नाना पाटेकर ने गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के साथ अपनी दोस्ती को याद किया। उन्होंने पर्रिकर के व्यक्तित्व और उनके काम करने के जुनून की सराहना करते हुए बताया कि उम्र में छोटे होने के बावजूद उनके व्यक्तित्व में ऐसा बड़प्पन था, जिसका सम्मान करना पड़ता था।

मनोहर पर्रिकर को याद कर कही ये बात

नाना पाटेकर ने मनोहर पर्रिकर को अपना करीबी दोस्त बताते हुए उनके व्यक्तित्व की तारीफ की। उन्होंने कहा कि पर्रिकर जैसे व्यक्ति का होना गर्व की बात है। अभिनेता ने उनके काम करने के तरीके और कम समय में बहुत कुछ हासिल करने की क्षमता का भी उल्लेख किया।

उनकी बातों में दोस्ती के साथ-साथ किसी व्यक्ति के काम और उसके समर्पण के प्रति सम्मान भी दिखाई दिया।

‘जाने से पहले क्या मैं अपना काम कर पा रहा हूं?’

अपने भाषण में नाना पाटेकर ने जिंदगी की अनिश्चितता का जिक्र करते हुए कहा कि हर व्यक्ति को एक दिन जाना है। इसलिए यह सोचना जरूरी है कि जीवन में जो काम करना चाहते हैं, क्या उसके लिए वास्तव में प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या जिंदगी केवल अपने परिवार और निजी दायरे तक सीमित रहनी चाहिए या समाज के लिए भी कुछ करने की कोशिश करनी चाहिए।

उनकी इन बातों का मूल संदेश यही था कि जीवन सीमित है, इसलिए अपने समय का इस्तेमाल सार्थक कामों के लिए करना चाहिए।

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Date : 09 October 2026 Posted By : ADMIN
नाना पाटेकर ने गोवा में जिंदगी और मौत पर की बात, बोले- मैं आज हूं, कल नहीं रहूंगा
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दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अपनी बेबाक बातों और दमदार अभिनय के लिए जाने जाते हैं। उनके विचार अक्सर जिंदगी, रिश्तों और समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारियों पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं। गोवा में एक पर्यटन कार्यक्रम के दौरान दिए गए उनके भाषण का जिक्र भी इसी संदर्भ में किया जा रहा है।

कार्यक्रम में नाना पाटेकर ने गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के साथ अपनी दोस्ती को याद किया। उन्होंने पर्रिकर के व्यक्तित्व और उनके काम करने के जुनून की सराहना करते हुए बताया कि उम्र में छोटे होने के बावजूद उनके व्यक्तित्व में ऐसा बड़प्पन था, जिसका सम्मान करना पड़ता था।

मनोहर पर्रिकर को याद कर कही ये बात

नाना पाटेकर ने मनोहर पर्रिकर को अपना करीबी दोस्त बताते हुए उनके व्यक्तित्व की तारीफ की। उन्होंने कहा कि पर्रिकर जैसे व्यक्ति का होना गर्व की बात है। अभिनेता ने उनके काम करने के तरीके और कम समय में बहुत कुछ हासिल करने की क्षमता का भी उल्लेख किया।

उनकी बातों में दोस्ती के साथ-साथ किसी व्यक्ति के काम और उसके समर्पण के प्रति सम्मान भी दिखाई दिया।

‘जाने से पहले क्या मैं अपना काम कर पा रहा हूं?’

अपने भाषण में नाना पाटेकर ने जिंदगी की अनिश्चितता का जिक्र करते हुए कहा कि हर व्यक्ति को एक दिन जाना है। इसलिए यह सोचना जरूरी है कि जीवन में जो काम करना चाहते हैं, क्या उसके लिए वास्तव में प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या जिंदगी केवल अपने परिवार और निजी दायरे तक सीमित रहनी चाहिए या समाज के लिए भी कुछ करने की कोशिश करनी चाहिए।

उनकी इन बातों का मूल संदेश यही था कि जीवन सीमित है, इसलिए अपने समय का इस्तेमाल सार्थक कामों के लिए करना चाहिए।

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