आकृति चौधरी NSA प्रकरण में FIR की मांग।

ब्यूरो रिपोर्ट

अमित सिंह बिष्ट

राजधानी/ लखनऊ

आकृति चौधरी NSA प्रकरण में FIR की मांग।

आज़ाद अधिकार सेना के अध्यक्ष एवं पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम से संबंधित आकृति चौधरी के NSA प्रकरण में सरकारी अभिलेखों के कथित फर्जीकरण के संबंध में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एवं पुलिस महानिदेशक को FIR दर्ज करने की शिकायत भेजी है।

शिकायत का आधार इलाहाबाद उच्च न्यायालय का 2 सितम्बर 2026 का H.C.P. No. 960/2026 में दिया गया निर्णय है।

उच्च न्यायालय ने धारा 130 BNSS की नोटिस तथा GD Entry No. 37 का परीक्षण करते हुए कहा कि नोटिस गिरफ्तारी के बाद तैयार की गई थी और इसे “गिरफ्तारी के बाद की गई कार्रवाई और मात्र एक दिखावा” बताया। न्यायालय ने रिकॉर्ड में “स्पष्ट फर्जीकरण” का भी उल्लेख किया।

न्यायालय ने WhatsApp सामग्री का परीक्षण करते हुए यह भी पाया कि 11 अप्रैल 2026 की शाम से प्राप्त संदेशों का कोई उत्तर नहीं दिया गया, जिससे यह संभावना पुष्ट होती है, कि आकृति चौधरी उस समय राज्य की हिरासत में थीं, जबकि उनकी औपचारिक गिरफ्तारी 12 अप्रैल 2026 को दर्शाई गई थी।

अमिताभ ठाकुर ने न्यायालय द्वारा रिकॉर्ड में बताए गए “स्पष्ट फर्जीकरण” के संबंध में अविलम्ब FIR दर्ज कर यह निर्धारित किए जाने की मांग की है कि संबंधित सरकारी अभिलेख किस अधिकारी/कर्मचारी द्वारा, कब और किन परिस्थितियों में तैयार अथवा परिवर्तित किए गए।

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Date : 28 September 2026 Posted By : ADMIN
आकृति चौधरी NSA प्रकरण में FIR की मांग।
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अमित सिंह बिष्ट

राजधानी/ लखनऊ

आकृति चौधरी NSA प्रकरण में FIR की मांग।

आज़ाद अधिकार सेना के अध्यक्ष एवं पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम से संबंधित आकृति चौधरी के NSA प्रकरण में सरकारी अभिलेखों के कथित फर्जीकरण के संबंध में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एवं पुलिस महानिदेशक को FIR दर्ज करने की शिकायत भेजी है।

शिकायत का आधार इलाहाबाद उच्च न्यायालय का 2 सितम्बर 2026 का H.C.P. No. 960/2026 में दिया गया निर्णय है।

उच्च न्यायालय ने धारा 130 BNSS की नोटिस तथा GD Entry No. 37 का परीक्षण करते हुए कहा कि नोटिस गिरफ्तारी के बाद तैयार की गई थी और इसे “गिरफ्तारी के बाद की गई कार्रवाई और मात्र एक दिखावा” बताया। न्यायालय ने रिकॉर्ड में “स्पष्ट फर्जीकरण” का भी उल्लेख किया।

न्यायालय ने WhatsApp सामग्री का परीक्षण करते हुए यह भी पाया कि 11 अप्रैल 2026 की शाम से प्राप्त संदेशों का कोई उत्तर नहीं दिया गया, जिससे यह संभावना पुष्ट होती है, कि आकृति चौधरी उस समय राज्य की हिरासत में थीं, जबकि उनकी औपचारिक गिरफ्तारी 12 अप्रैल 2026 को दर्शाई गई थी।

अमिताभ ठाकुर ने न्यायालय द्वारा रिकॉर्ड में बताए गए “स्पष्ट फर्जीकरण” के संबंध में अविलम्ब FIR दर्ज कर यह निर्धारित किए जाने की मांग की है कि संबंधित सरकारी अभिलेख किस अधिकारी/कर्मचारी द्वारा, कब और किन परिस्थितियों में तैयार अथवा परिवर्तित किए गए।

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