विशेष रिपोर्ट
अनुराग सिंह बिष्ट
उत्तर प्रदेश/ वाराणसी
*वाराणसी विकास खण्ड आराजी लाईन झबरा गांव में 10 कड़ी का रास्ता बदहाल, आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार अधिकारी? खेतों की मिट्टी कटने से रास्ते पर मंडरा रहा खतरा*
वाराणसी | आराजी लाइन | ग्राम सभा झबरा
ग्रामीणों की परेशानी दूर करने के लिए आखिर कब होगी ठोस कार्रवाई? मनरेगा से कई बार कच्चा काम होने के बावजूद नहीं हुई इंटरलॉकिंग!
वाराणसी जनपद के विकास खंड आराजी लाइन अंतर्गत ग्राम सभा झबरा में 10 कड़ी के रास्ते की बदहाली अब गंभीर सवाल खड़े कर रही है। यह रास्ता झबरा, देईपुर, जलालपुर और नैपूरा को पक्की सड़क से जोड़ने का महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इसके बावजूद आज तक इस रास्ते पर पूरी तरह इंटरलॉकिंग का कार्य नहीं हो सका है। नतीजा यह है कि आने-जाने वाले ग्रामीणों और राहगीरों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मनरेगा से कई बार कच्चा काम, फिर भी समस्या जस की तस!
स्थानीय लोगों के अनुसार, रास्ते के कुछ हिस्सों में निर्माण कार्य कराया गया है। मनरेगा (नरेगा) के तहत भी दो-तीन बार कच्चा काम कराया जा चुका है। लेकिन सवाल यह है कि जब इस रास्ते पर पहले भी काम हो चुका है, तो फिर इसका स्थायी समाधान अब तक क्यों नहीं निकाला गया?
क्या ग्रामीणों को इसी तरह बदहाल रास्ते पर चलने के लिए मजबूर रहना पड़ेगा? आखिर कब तक पक्के रास्ते की मांग अधूरी रहेगी?
रास्ते की मिट्टी काटने और घास फेंकने का आरोप, आवागमन पर संकट!
ग्रामीणों का आरोप है कि रास्ते के किनारे स्थित खेतों के कुछ मालिक आए दिन रास्ते की मिट्टी काटते रहते हैं। इतना ही नहीं, खेतों की घास और अन्य कृषि अवशेष भी रास्ते पर फेंक दिए जाते हैं। इससे रास्ते की स्थिति लगातार बिगड़ने की शिकायत सामने आ रही है।
यदि समय रहते इस मामले की जांच नहीं हुई और रास्ते की भूमि को सुरक्षित रखने के लिए उचित कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
आखिर जिम्मेदारी किसकी? ग्रामीणों को कब मिलेगी राहत?
यह रास्ता केवल आने-जाने का साधन नहीं, बल्कि आसपास के गांवों को पक्की सड़क से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। ऐसे में इसकी बदहाली को नजरअंदाज करना ग्रामीणों की समस्याओं को और बढ़ा सकता है।
ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर रास्ते की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करें, सरकारी भूमि की पैमाइश कराएं और रास्ते को नुकसान पहुंचाने की शिकायतों की निष्पक्ष जांच करें।
प्रशासन से ग्रामीणों की पुरजोर मांग
ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव, खंड विकास अधिकारी (BDO), आराजी लाइन तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि:
पहली मांग: झबरा गांव के 10 कड़ी के रास्ते की तत्काल जांच और पैमाइश कराई जाए।
दूसरी मांग: रास्ते की मिट्टी काटने और घास फेंकने की शिकायतों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
तीसरी मांग: रास्ते पर पहले मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों का विवरण और वर्तमान स्थिति की जांच की जाए।
चौथी मांग: नियमानुसार बजट और स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी कराकर रास्ते पर इंटरलॉकिंग का कार्य कराया जाए।
पांचवीं मांग: रास्ते को भविष्य में क्षतिग्रस्त होने से बचाने के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि ग्रामीणों को बार-बार इसी समस्या का सामना न करना पड़े।
अब देखना है कि प्रशासन कब लेता है संज्ञान!
झबरा गांव के इस रास्ते की समस्या ने ग्रामीण संपर्क मार्गों के रखरखाव और विकास कार्यों की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जरूरत है कि संबंधित अधिकारी मामले को गंभीरता से लें, मौके की जांच करें और ग्रामीणों को राहत दिलाने के लिए ठोस कदम उठाएं।
ग्रामीणों की मांग साफ है—रास्ते की समस्या का स्थायी समाधान हो, रास्ते की जमीन सुरक्षित रहे और झबरा से देईपुर, जलालपुर व नैपूरा को जोड़ने वाले इस संपर्क मार्ग पर जल्द से जल्द इंटरलॉकिंग का काम कराया जाए।
🗣️ जनहित में बड़ा सवाल:
जब रास्ते पर पहले भी मनरेगा से कच्चा काम कराया जा चुका है, तो आज तक पक्की इंटरलॉकिंग क्यों नहीं हुई? क्या संबंधित अधिकारी इस समस्या पर संज्ञान लेकर ग्रामीणों को राहत दिलाएंगे, या लोगों को इसी बदहाल रास्ते पर चलने के लिए मजबूर रहना पड़ेगा?
वाराणसी विकास खण्ड आराजी लाईन ग्राम सभा झबरा, जनपद वाराणसी, उत्तर प्रदेश।
प्रधान संपादक विशेष रिपोर्ट




