विशेष रिपोर्ट
अनुराग सिंह बिष्ट
राजधानी/ लखनऊ
*लखनऊ ब्रेकिंग: यूपी में भाजपा के 100 से ज्यादा विधायकों के टिकट पर संकट! गुजरात फॉर्मूले की चर्चा से सियासी हलचल तेज*
*लखनऊ।* उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी की रणनीति में बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। सत्ता में लगातार तीसरी बार वापसी के लक्ष्य के बीच पार्टी एंटी-इनकंबेंसी यानी सरकार और विधायकों के खिलाफ संभावित नाराजगी से निपटने के लिए गुजरात फॉर्मूले पर विचार कर सकती है। इस रणनीति के तहत बड़ी संख्या में मौजूदा विधायकों के टिकट काटकर नए चेहरों को मौका दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
*124 विधायकों की रिपोर्ट पर उठे सवाल!*
सूत्रों के हवाले से किए जा रहे दावों के मुताबिक, भाजपा के आंतरिक सर्वे में 124 विधायकों की रिपोर्ट संतोषजनक नहीं बताई जा रही है। इनमें करीब 40 प्रतिशत विधायक ऐसे बताए जा रहे हैं, जो कम से कम दो बार चुनाव जीत चुके हैं। यदि इन आकलनों के आधार पर उम्मीदवारों का चयन होता है, तो कई मौजूदा विधायकों की उम्मीदवारी पर संकट आ सकता है।
हालांकि, अभी 100 से अधिक विधायकों के टिकट कटने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। अंतिम फैसला पार्टी के सर्वे, क्षेत्रीय समीकरण, जनसमर्थन और उम्मीदवारों की स्थिति के आधार पर ही होने की बात कही जा रही है।
*लोकसभा चुनाव के नतीजों से लिया जा सकता है सबक*
उत्तर प्रदेश में पिछले लोकसभा चुनाव के परिणामों ने भाजपा के सामने मौजूदा जनप्रतिनिधियों के प्रदर्शन और उम्मीदवार चयन को लेकर सवाल खड़े किए थे। ऐसे में विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी नए चेहरों को मौका देने और क्षेत्रीय स्तर पर संगठन को मजबूत करने के विकल्पों पर विचार कर सकती है।
*पुराने चेहरों की जगह नए उम्मीदवारों को मिल सकता है मौका*
राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक, गुजरात की तर्ज पर बड़े पैमाने पर उम्मीदवार बदलने की रणनीति अपनाई गई तो कई सीटों पर नए चेहरे देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, केवल पुराने होने या एक से अधिक बार चुनाव जीतने के आधार पर टिकट कटना तय नहीं माना जा सकता। मजबूत जनाधार और क्षेत्र में स्वीकार्यता रखने वाले विधायकों को दोबारा मौका भी मिल सकता है।
*सभी विधायकों पर नहीं गिरेगी गाज!*
दावों के अनुसार, आंतरिक सर्वे में सौ से अधिक विधायकों की स्थिति संतोषजनक बताई जा रही है। ऐसे में टिकट वितरण के दौरान पार्टी के सामने एक ओर मौजूदा विधायकों के अनुभव को बनाए रखने और दूसरी ओर नए चेहरों को अवसर देने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी।
*फिलहाल, 100 से अधिक विधायकों के टिकट कटने की चर्चा राजनीतिक हलकों में है, लेकिन इसे भाजपा का अंतिम निर्णय नहीं माना जाना चाहिए। आधिकारिक घोषणा और सर्वे से जुड़े प्रमाणित विवरण सामने आने के बाद ही तस्वीर स्पष्ट होगी।*




